नई दिल्ली, 16 जून।
भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी तकनीक से लंबी दूरी के कामिकेज ड्रोन विकसित करने की दिशा में एक नई परियोजना शुरू की है। इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के तहत भारतीय उद्योगों की भागीदारी से वन-वे अटैक ड्रोन तैयार किए जाएंगे। वायु सेना ने इस उद्देश्य के लिए भारतीय कंपनियों के चयन हेतु सीमित निविदा प्रक्रिया शुरू की है। परियोजना का संचालन तमिलनाडु के कोयंबटूर के निकट सुलूर स्थित 5 बेस रिपेयर डिपो द्वारा किया जाएगा, जिसे इसके लिए नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है।
कामिकेज ड्रोन, जिन्हें लोइटरिंग म्यूनिशन या आत्मघाती ड्रोन भी कहा जाता है, ऐसे मानव रहित हवाई प्लेटफॉर्म होते हैं जो लक्ष्य क्षेत्र तक पहुंचकर दुश्मन की पहचान करते हैं और उससे टकराकर विस्फोट करते हैं। रक्षा मंत्रालय के निर्णय के तहत इस ड्रोन प्लेटफॉर्म से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार भारतीय वायु सेना के पास सुरक्षित रहेंगे। इसका डिजाइन, विकास और निर्माण पूरी तरह देश के भीतर घरेलू कंपनियों और स्टार्टअप्स की भागीदारी से किया जाएगा।
वायु सेना का मानना है कि इस पहल से आवश्यकता के अनुसार त्वरित अपग्रेड, तकनीकी संशोधन और संचालन संबंधी अनुकूलन संभव हो सकेगा। सेना के अनुसार प्रस्तावित लंबी दूरी के ये ड्रोन 16,000 फीट की ऊंचाई तक प्रभावी रूप से उड़ान भरने में सक्षम होंगे और दिन तथा रात दोनों समय संचालन कर सकेंगे।
इससे पहले नेशनल डिफेंस इंडस्ट्रीज कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि भारत को ड्रोन निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए मिशन मोड में कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने इसे रणनीतिक स्वायत्तता, मजबूत रक्षा तैयारी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में अहम कदम बताया था।
रक्षा मंत्री ने कहा था कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और ईरान-इजराइल तनाव जैसे हालिया घटनाक्रम यह संकेत देते हैं कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश में केवल ड्रोन का अंतिम उत्पाद ही नहीं, बल्कि उसके सभी प्रमुख पुर्जों और तकनीकी घटकों का निर्माण भी भारत में होना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि ड्रोन के मोल्ड्स, सॉफ्टवेयर, इंजन और बैटरी जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण भी देश के भीतर होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई देशों में आज भी ड्रोन के अहम घटकों के लिए चीन पर निर्भरता बनी हुई है। साथ ही उन्होंने बताया कि भारत के रक्षा नवाचार तंत्र में स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
फरवरी 2026 तक आईडेक्स पहल के अंतर्गत 676 स्टार्टअप्स, एमएसएमई और नवोन्मेषकों को जोड़ा जा चुका है तथा 548 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इनमें से 58 प्रोटोटाइप को खरीद के लिए मंजूरी मिली है, जिनका अनुमानित मूल्य लगभग 3,853 करोड़ रुपये है। इसके अतिरिक्त करीब 2,326 करोड़ रुपये के 45 खरीद अनुबंध भी संपादित किए जा चुके हैं।













