भोपाल, 1 जुलाई।
मानसून की सुस्त चाल ने भोपाल समेत पूरे मध्यप्रदेश में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बादल मंडरा रहे हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं हो रही। तेज धूप और चिपचिपी उमस ने मौसम को बीमारी के अनुकूल बना दिया है। इसका असर अस्पतालों में साफ दिखाई दे रहा है, जहां मौसमी रोगों के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
रुक-रुककर हो रही बूंदाबांदी और उमस ने बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर दिया है। उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार, डायरिया, वायरल संक्रमण और चर्म रोग के मामलों में तेजी आई है। सरकारी और निजी अस्पतालों में पिछले एक सप्ताह के दौरान मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी, उमस और दूषित खानपान इसके प्रमुख कारण हैं।
थोड़ी बारिश के बाद निकलने वाली तेज धूप से जगह-जगह पानी जमा हो रहा है, जो एडीज मच्छर के प्रजनन का केंद्र बन रहा है। भोपाल में डेंगू और चिकनगुनिया के शुरुआती मामले सामने आने लगे हैं। यदि जुलाई में लगातार बारिश हुई तो संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है। ऐसे में नगर निगम को फॉगिंग और लार्वा नष्ट करने का अभियान तेज करना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर पड़ा है, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश की संभावना है। तब तक लोगों को उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पीना चाहिए, ताजा भोजन करना चाहिए और घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। बुखार, लगातार दस्त या तेज शारीरिक दर्द होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना आवश्यक है।
मानसून की देरी केवल किसानों की चिंता नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य का भी बड़ा प्रश्न है। मौसम पर हमारा नियंत्रण नहीं, लेकिन सावधानी और समय पर उपचार से बीमारियों पर अवश्य नियंत्रण पाया जा सकता है।



















