विक्टोरिया, 01 जुलाई।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और सेशेल्स के मत्स्य पालन, कृषि एवं ब्लू इकोनॉमी मंत्रालय के अंतर्गत कृषि विभाग ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा, क्षमता निर्माण और तकनीक हस्तांतरण के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स की आधिकारिक यात्रा के दौरान संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को नई मजबूती देना है।
एमओयू के तहत संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसके साथ ही वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों का आदान-प्रदान किया जाएगा तथा उन्नत कृषि तकनीक और श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को साझा करने की व्यवस्था भी की गई है।
साझेदारी को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 से 2031 तक की अवधि के लिए पांच वर्षीय कार्ययोजना पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इसमें जलवायु अनुकूल कृषि, बागवानी, फसल कटाई के बाद प्रबंधन, पशुधन विकास तथा टिकाऊ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
मंत्रालय के अनुसार इस सहयोग का उद्देश्य संस्थागत संबंधों को मजबूत करना, कृषि उत्पादकता बढ़ाना, तकनीकी क्षमता का विकास करना और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है। साथ ही जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा जैसी उभरती चुनौतियों से निपटने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मंत्रालय ने बताया कि आईसीएआर वैश्विक स्तर पर कृषि सहयोग को विस्तार देने के लिए अब तक दुनिया भर की विभिन्न संस्थाओं के साथ 100 से अधिक समझौता ज्ञापन कर चुका है।
मंत्रालय के मुताबिक सेशेल्स के साथ हुआ यह समझौता ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत की भागीदारी को और मजबूत करेगा। इसके माध्यम से टिकाऊ कृषि, नवाचार तथा वैश्विक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रयास तेज होंगे।
इस सप्ताह की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के बीच हुई वार्ता के बाद दोनों देशों ने व्यापार, डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृषि सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए अनेक समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे।
इन प्रमुख निर्णयों में भारतीय निर्यात-आयात बैंक और सेशेल्स के वित्त, आर्थिक नियोजन, व्यापार एवं निवेश मंत्रालय के बीच 1,250 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा संबंधी रूपरेखा पर हस्ताक्षर भी शामिल रहे, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच विकास सहयोग को आगे बढ़ाना है।




















