नई दिल्ली, 01 जुलाई।
दिल्ली सरकार ने सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए हर वर्ष 1 नवंबर से 28 फरवरी तक लागू रहने वाले व्यापक और स्थायी दिशा-निर्देश अधिसूचित किए हैं। इस पहल का काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) ने स्वागत करते हुए इसे प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
सीईईडब्ल्यू की फेलो प्रार्थना बोराह ने कहा कि दिल्ली में नवंबर से फरवरी के बीच स्थानीय और क्षेत्रीय प्रदूषण स्रोतों के साथ प्रतिकूल मौसम के कारण वायु गुणवत्ता सबसे अधिक प्रभावित होती है। कम तापमान और धीमी हवाओं के चलते प्रदूषक वातावरण की निचली परत में ही बने रहते हैं, जिससे प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि सीईईडब्ल्यू के आकलन के अनुसार पिछले तीन वर्षों में इस अवधि के दौरान दिल्ली में हर साल 15 से अधिक दिन ऐसे रहे, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज किया गया। ऐसे में सर्दियों के लिए पूर्व तैयारी के रूप में लागू किया गया विंटर एयर क्वालिटी फ्रेमवर्क एक सकारात्मक और आवश्यक पहल है।
प्रार्थना बोराह ने कहा कि यह फ्रेमवर्क विभिन्न क्षेत्रों के लिए स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत करता है, लेकिन इसकी सफलता प्रभावी अनुपालन, नियमित निगरानी और सख्त प्रवर्तन पर निर्भर करेगी। उन्होंने विशेष रूप से सुरक्षा कर्मियों और अन्य खुले स्थानों पर कार्य करने वाले श्रमिकों द्वारा सर्दियों में आग जलाने की प्रथा को हतोत्साहित करने और उनके लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
नई अधिसूचना के तहत दिल्ली के सभी पेट्रोल पंप, डीजल स्टेशन और सीएनजी आउटलेट केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन उपलब्ध कराएंगे, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) होगा। प्रमाणपत्र का सत्यापन फिजिकल कॉपी, एएनपीआर कैमरा प्रणाली या वाहन डेटाबेस के माध्यम से किया जाएगा।




















