नई दिल्ली, 3 जुलाई।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्यप्रदेश के सागर जिले के बांदा सिविल अस्पताल में कथित चिकित्सीय लापरवाही के कारण डेढ़ वर्षीय बच्चे की आंखों की रोशनी जाने से जुड़े मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले को गंभीर मानते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डेढ़ वर्षीय बच्चे को सर्दी और आंखों में लालपन की शिकायत होने पर परिजन इलाज के लिए बांदा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि उपचार के दौरान डॉक्टरों ने आंखों में डाली जाने वाली दवा के स्थान पर नाक में इस्तेमाल होने वाली नेजल ड्रॉप्स आंखों में डाल दी। इसके बाद बच्चे की आंखों में गंभीर संक्रमण हो गया और उसकी दृष्टि प्रभावित हो गई।
बच्चे की तबीयत बिगड़ने पर उसे पहले जिला अस्पताल भेजा गया। बाद में बेहतर उपचार के लिए एम्स भोपाल रेफर किया गया, जहां उसका इलाज कराया गया।
परिजनों का आरोप है कि एम्स के चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि संक्रमण के कारण बच्चे की आंखों की रोशनी वापस आना संभव नहीं है।
एनएचआरसी ने अपने संज्ञान में कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह चिकित्सा सेवाओं में गंभीर लापरवाही और मानवाधिकार के उल्लंघन का मामला माना जाएगा। आयोग ने मुख्य सचिव से पूरे घटनाक्रम, जांच की वर्तमान स्थिति, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तथा पीड़ित बच्चे को उपलब्ध कराए गए उपचार और सहायता के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने यह रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

















