भोपाल, 04 जुलाई।
मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में समिति प्रणाली की समीक्षा के लिए गठित पीठासीन अधिकारियों की समिति की अंतिम बैठक शनिवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा, कोलकाता में आयोजित हुई। तीन चरणों में हुई समीक्षा बैठकों के बाद समिति ने विधानसभा समितियों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने के लिए 11 महत्वपूर्ण अनुशंसाएं तैयार कीं। इन सिफारिशों का प्रतिवेदन सात राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया।
प्रतिवेदन सौंपने के दौरान मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र नाथ बोस, सिक्किम विधानसभा अध्यक्ष मिंग्मा नोर्बु शेरपा तथा ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष सुरामा पाढ़ी उपस्थित रहे।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी कार्यवाही में वित्तीय एवं तदर्थ समितियों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से इस समिति का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को सौंपी गई थी। समिति में मध्य प्रदेश सहित राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के विधानसभा अध्यक्ष शामिल थे।
समिति की पहली बैठक 14 जुलाई 2025 को भोपाल में, दूसरी बैठक 5 मई 2026 को जयपुर में तथा तीसरी एवं अंतिम बैठक कोलकाता में आयोजित हुई। अंतिम बैठक में विधानसभा समितियों की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और प्रभावशीलता बढ़ाने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
समिति ने समितियों की बैठकों की संख्या, सदस्यों के कार्यकाल, कोरम, समितियों की अनुशंसाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विधेयकों को समितियों को भेजने की प्रक्रिया, समिति प्रतिवेदनों पर चर्चा, विशेषज्ञों को आमंत्रित करने, प्रशिक्षण कार्यक्रम, विभागीय अधिकारियों की उपस्थिति, बजट परीक्षण के लिए स्थायी समितियों के गठन, सलाहकार समितियों के गठन तथा अध्ययन दौरों के बाद की जाने वाली कार्यवाहियों सहित 11 प्रमुख बिंदुओं पर अपनी अनुशंसाएं प्रस्तुत की हैं।

















