धर्मशाला, 08 जुलाई।
कांगड़ा जिला प्रशासन ने धौलाधार की ऊंची चोटियों पर जाने वाले सैलानियों की सुरक्षा के लिए सख्ती बढ़ा दी है। अब जिले के प्रमुख ट्रेकिंग रूटों पर जाने से पहले पंजीकरण करवाना हर हाल में अनिवार्य कर दिया गया है।
हाल ही में ट्रेकर्स के लापता होने और दुर्गम रास्तों पर फंसने के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला मजिस्ट्रेट हेमराज बैरवा ने यह निर्देश जारी किए हैं। ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और 15 अक्तूबर तक प्रभावी रहेंगे।
प्रशासन के अनुसार, मानसून सीजन के दौरान पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और घने कोहरे के चलते ट्रेकिंग करना जानलेवा हो सकता है। बिना पूर्व सूचना के ट्रेकिंग पर निकलने से रेस्क्यू ऑपरेशन में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कुल 10 रूट चिन्हित किए हैं। इनमें बलेणी, मिनिकियाणी, भीमघसूतड़ी, इंद्रहार, कुंदली, तोराल, तालंग, सिंघाड़, वरू और जालसू पास शामिल हैं। इन रूटों के प्रवेश बिंदुओं पर अब आपदा प्रबंधन चेक पोस्ट बनाई गई हैं।
यह चेक पोस्ट सुबह 5 से शाम 5 बजे तक खुली रहेंगी। ट्रेकर्स को यहां अपना विवरण, यात्रा प्लान और लौटने का समय दर्ज कराना होगा। बिना पंजीकरण के जाने वाले किसी भी ट्रेकर को दुर्घटना होने पर रेस्क्यू का पूरा खर्च स्वयं उठाना पड़ेगा।
नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी ट्रेकर्स से सुरक्षा नियमों का पालन करने की अपील की है।














