राजनीति
09 Jul, 2026

सिंधिया ने निवेशकों को दिया त्रिपुरा में निवेश का न्योता

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026 में निवेशकों से त्रिपुरा की औद्योगिक, प्राकृतिक और रणनीतिक संभावनाओं का लाभ उठाकर राज्य के विकास में भागीदार बनने का आह्वान किया।

अगरतला, 9 जुलाई।

केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास एवं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से आयोजित ‘डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए देश और विदेश के उद्योग जगत से त्रिपुरा में निवेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य तेजी से पूर्वोत्तर के प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में उभर रहा है और उद्योग, व्यापार तथा वैश्विक निवेश के लिए नए अवसर उपलब्ध करा रहा है।

सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत विकसित भारत की यात्रा का महत्वपूर्ण विकास इंजन बन चुका है। उनके अनुसार, एक्ट ईस्ट नीति ने पूर्वोत्तर को सीमावर्ती क्षेत्र की पहचान से आगे बढ़ाकर दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रवेश द्वार के रूप में स्थापित किया है, जिससे व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय संपर्क के नए अवसर पैदा हुए हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा के नेतृत्व में त्रिपुरा बेहतर कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश-अनुकूल वातावरण वाले राज्य के रूप में तेजी से विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि डेस्टिनेशन त्रिपुरा बिजनेस कॉन्क्लेव इस बात का प्रमाण है कि राज्य दीर्घकालिक निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। सिंधिया के अनुसार, अगरतला दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है, जो 67 करोड़ से अधिक आबादी वाले आसियान बाजार से भारत को जोड़ने की क्षमता रखता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा प्राकृतिक गैस, बांस, अगरवुड, रबर, चाय, मसालों और बागवानी उत्पादों जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षित मानव संसाधन, निवेश-अनुकूल नीतियां, तेजी से विकसित हो रही आधारभूत संरचना और भारत का तीसरा अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट गेटवे मौजूद है। देश का सबसे बड़ा बांस उत्पादक और प्राकृतिक रबर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के कारण त्रिपुरा विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक्स, निर्यात और तकनीक आधारित उद्योगों के लिए व्यापक संभावनाएं उपलब्ध कराता है।

सिंधिया ने कहा कि "निवेश विश्वास का अनुसरण करता है, विश्वास अधोसंरचना का और अधोसंरचना दूरदृष्टि का परिणाम होती है।" उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और संस्थागत सहयोग के माध्यम से पूर्वोत्तर क्षेत्र की विकास तस्वीर बदल दी है। उन्होंने भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग, कालादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना, सबरूम विशेष आर्थिक क्षेत्र, मैत्री सेतु और एकीकृत चेक पोस्ट जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल त्रिपुरा को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भारत के निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने निवेशकों से त्रिपुरा की संभावनाओं का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि जो राज्य कभी भू-आवेष्ठित माना जाता था, वह आज बंगाल की खाड़ी तक पहुंच का महत्वपूर्ण द्वार बन रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के अष्टलक्ष्मी राज्य भारत की अगली आर्थिक विकास यात्रा का नेतृत्व करेंगे और त्रिपुरा इस परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बनेगा।

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