शहडोल, 9 जुलाई।
अपने ट्रैफिक जागरूकता वीडियो के कारण पहचान बनाने वाले शहडोल के निलंबित प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी ने अपने रुख में बदलाव किया है। पहले पुलिस सेवा से त्यागपत्र देने की बात कहने वाले तिवारी ने अब कहा है कि यदि विभाग उनका निलंबन समाप्त करता है तो वह दोबारा ड्यूटी करने के लिए तैयार हैं।
तत्कालीन एसपी रामजी श्रीवास्तव के तबादले के बाद गुरुवार को विवेकानंद तिवारी का नया बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि बहाली होने पर वह पुलिस विभाग में अपनी सेवाएं फिर से शुरू करेंगे।
गौरतलब है कि 4 जून को तत्कालीन एसपी रामजी श्रीवास्तव ने विवेकानंद तिवारी को निलंबित किया था। यह कार्रवाई मेडिकल अवकाश और विभागीय प्रक्रिया से जुड़े मामले में की गई थी। इसके साथ ही सोशल मीडिया के व्यावसायिक उपयोग से अतिरिक्त कमाई के आरोपों को लेकर विभागीय जांच भी शुरू की गई थी।
निलंबन की कार्रवाई से नाराज होकर तिवारी ने 10 जून को विभाग को त्यागपत्र सौंप दिया था। हालांकि तत्कालीन एसपी ने उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और विभागीय जांच जारी रखने के निर्देश दिए। इसके चलते वह अभी भी वैधानिक रूप से निलंबित हैं और उन्होंने दोबारा ड्यूटी ज्वाइन नहीं की है।
अब नए घटनाक्रम के बाद तिवारी ने कहा है कि यदि विभाग उन्हें बहाल करता है तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में नौकरी पर लौटने के बाद वह पुलिस वर्दी पहनकर सोशल मीडिया के लिए वीडियो नहीं बनाएंगे।
तिवारी ने कहा कि सड़क सुरक्षा और यातायात जागरूकता अभियान जारी रहेगा, लेकिन अब वह ड्यूटी समय के बाद सिविल ड्रेस में वीडियो तैयार करेंगे।
विवेकानंद तिवारी सोशल मीडिया के कई प्लेटफॉर्म पर लोकप्रिय हैं। उनके डेढ़ करोड़ से अधिक फॉलोअर्स बताए जाते हैं। उनके बदले हुए रुख के बाद पुलिस विभाग और आम लोगों के बीच इस मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
विभागीय जांच अभी पूरी नहीं हुई है, ऐसे में निलंबन समाप्त होने और उनकी वापसी को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं।















