नई दिल्ली, 16 जुलाई।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचकर अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार से वांगचुक की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
सोनम वांगचुक शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार 19वें दिन अनशन पर हैं। मुलाकात के बाद आयोजित सभा में केजरीवाल ने कहा कि सरकार को युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। उनका कहना था कि यदि युवाओं की आवाज की अनदेखी की गई तो वर्ष 2029 में सरकार को राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा पत्र लीक, मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मामलों के बावजूद जवाबदेही तय नहीं की जा रही है। उनका आरोप था कि इन मुद्दों पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
पत्रकारों से बातचीत में केजरीवाल ने कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक प्रकरण के बाद भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम सामने नहीं आए। उन्होंने यह भी कहा कि सीबीएसई की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे सवालों के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धर्मेंद्र प्रधान की जगह सोनम वांगचुक को केंद्रीय शिक्षा मंत्री बनाना चाहिए। उनका दावा था कि वांगचुक शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार करने की क्षमता रखते हैं, हालांकि उन्हें इसकी संभावना कम दिखाई देती है।
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने वर्ष 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वह आंदोलन भी जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और कुछ वर्षों बाद तत्कालीन सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवाओं के मुद्दों पर ध्यान नहीं देगी तो भविष्य में उसे भी ऐसे राजनीतिक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।














