जयपुर, 23 जुलाई।
राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) की स्कूल शिक्षक भर्ती-2022 में फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी दिलाने के मामले में एसओजी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मेवाड़ यूनिवर्सिटी के तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक और गिरोह के कथित मुख्य दलाल को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद 25 जुलाई तक पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा गया है। एसओजी अब दोनों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (एसओजी) विशाल बंसल ने बताया कि प्राध्यापक (हिंदी) स्कूल शिक्षा प्रतियोगी परीक्षा-2022 में अभ्यर्थी कमला कुमारी पुत्री भारमल बिश्नोई ने पात्रता के लिए मेवाड़ यूनिवर्सिटी से जारी एमए (हिंदी) की डिग्री और अंकतालिका प्रस्तुत की थी। आरपीएससी की ओर से सत्यापन कराए जाने पर विश्वविद्यालय ने ऐसी कोई डिग्री जारी करने से इनकार कर दिया। इसके बाद फर्जी दस्तावेज और झूठे शपथ-पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने के आरोप में अजमेर के सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज किया गया, जिसकी जांच बाद में एसओजी को सौंपी गई।
जांच में सामने आया कि अशोक बिश्नोई उर्फ अशोक चोटिया (32) निवासी झंवर, जिला जोधपुर ने महेंद्र सिंह राव के माध्यम से अभ्यर्थी कमला कुमारी के भाई दलपत सिंह से संपर्क किया। इसके बाद मेवाड़ यूनिवर्सिटी के डीन कौशल किशोर चंदुल से कथित सांठगांठ कर कमला कुमारी के लिए एमए (हिंदी) की फर्जी डिग्री और अंकतालिका तैयार करवाई। पूछताछ के बाद एसओजी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
एसओजी के अनुसार अशोक बिश्नोई फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने वाले मामलों में पहले भी गिरफ्तार हो चुका है। उसके खिलाफ सिविल लाइंस थाना, अजमेर में दर्ज प्रकरण के अलावा जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाना में दर्ज मामले में भी कार्रवाई हो चुकी है। वहीं जयपुर स्थित एसओजी थाने में पीटीआई भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने के मामले में भी उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज है।
एसओजी ने अलीगढ़ निवासी सुशील शर्मा (43) को भी गिरफ्तार किया है, जो मेवाड़ यूनिवर्सिटी में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत था। जांच में उसकी भूमिका विश्वविद्यालय के सिस्टम का दुरुपयोग कर कमला कुमारी के लिए फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार कराने में सामने आई। एसओजी ने उसे 23 जुलाई को दोपहर 3:30 बजे गिरफ्तार किया।
पुलिस के अनुसार सुशील शर्मा के खिलाफ भी अजमेर के सिविल लाइंस थाने में दर्ज फर्जी डिग्री तैयार कराने के मामले में पहले से कार्रवाई हो चुकी है।
एसओजी अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान सामने आए विश्वविद्यालय के अन्य प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।












