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संपादकीय
23 Jul, 2026

मेट्रोपोलिटन रीजन में नई व्यवस्था, अब जनता चुनेगी विकास की दिशा

महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम, 2026 के तहत मेट्रोपोलिटन रीजन में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ सुनियोजित शहरी विकास की नई व्यवस्था लागू की गई है।

भोपाल, 23 जुलाई।

राज्य सरकार ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के माध्यम से महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम, 2026 जारी किए हैं। इसके तहत राज्य के बड़े शहरों में मेट्रोपोलिटन रीजन बनाकर उनके सुनियोजित विकास की नई व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य तेजी से बढ़ते शहरीकरण को नियंत्रित करना और भविष्य के विकास को योजनाबद्ध बनाना है। सरकार ने इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम यह उठाया है कि अब मेट्रोपोलिटन रीजन की प्लानिंग कमेटी में 30 सदस्य निर्वाचित होंगे, जिससे विकास कार्यों में जनता की भागीदारी सुनिश्चित होगी। यह व्यवस्था प्रदेश के सभी बड़े शहरों में लागू की जाएगी, ताकि शहरीकरण की चुनौतियों का समाधान एक समान नीति के तहत किया जा सके।

नए नियमों के अनुसार प्रत्येक मेट्रोपोलिटन रीजन के लिए 45 सदस्यीय प्लानिंग कमेटी का गठन होगा। इसमें 30 सदस्य निर्वाचित तथा 15 सदस्य पदेन एवं विशेष आमंत्रित होंगे। निर्वाचित सदस्यों का चयन संबंधित नगरपालिकाओं और पंचायतों के जनप्रतिनिधियों में से जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा। नगरपालिकाओं के निर्वाचित सदस्य और पंचायतों के अध्यक्ष इसमें शामिल होंगे। यदि किसी सदस्य का कोई आर्थिक हित पाया जाता है तो सरकार उसे हटा सकेगी। कमेटी की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे तथा नगरीय विकास मंत्री इसके उपाध्यक्ष होंगे। कमेटी की बैठक प्रत्येक छह माह में होगी और मेट्रोपोलिटन कमिश्नर इसके सदस्य सचिव होंगे। शहरी नियोजन, पर्यावरण, परिवहन और अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया जाएगा, ताकि योजनाओं में तकनीकी दृष्टिकोण शामिल हो सके।

नियमों के तहत मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी का गठन भी किया गया है, जिसके प्रमुख के रूप में राज्य सरकार एक कमिश्नर नियुक्त करेगी। कमिश्नर ही अथॉरिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी होंगे और पूरे क्षेत्र में विकास कार्यों की निगरानी करेंगे। अथॉरिटी में नियोजन, अभियंत्रिकी तथा अन्य विभागों के अधिकारियों को भी सदस्य बनाया जाएगा। इसे विकास अनुज्ञा देने, शुल्क वसूलने तथा नियमों का पालन सुनिश्चित करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, यह प्रत्येक वर्ष आय-व्यय का विवरण और आगामी वर्ष की कार्ययोजना तैयार कर शासन को प्रस्तुत करेगी।

प्रत्येक मेट्रोपोलिटन रीजन के लिए एक महानगर विकास एवं निवेश योजना भी तैयार की जाएगी। योजना का प्रकाशन कर उस पर जनता से दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। एक समिति इनका परीक्षण कर निराकरण करेगी, जिसके बाद योजना का राजपत्र अधिसूचना जारी होगी। राज्य सरकार आवश्यकता पड़ने पर स्वप्रेरणा से अथवा समिति या अथॉरिटी के अनुरोध पर योजना में संशोधन भी कर सकेगी, ताकि भविष्य की बड़ी राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय परियोजनाओं को इसमें समायोजित किया जा सके।

मेट्रोपोलिटन अथॉरिटी को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार भी दिए गए हैं। विकास कार्य पूरा होने के बाद वह क्षेत्र के उपभोक्ताओं से विकास प्रभार वसूल सकेगी। अथॉरिटी अपनी संपत्तियों का निपटान ऑनलाइन बोली के माध्यम से करेगी तथा पूर्व निर्धारित मूल्य पर लॉटरी से आवंटन भी कर सकेगी। किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को पीपीपी मोड पर लागू करने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना है।

परिवहन व्यवस्था को भी एकीकृत करने का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक मेट्रोपोलिटन रीजन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय एकीकृत महानगर परिवहन प्राधिकरण बनाया जाएगा। इसमें संबंधित विभागों के सचिव और परिवहन विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह प्राधिकरण मेट्रो, बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को जोड़ते हुए एकीकृत परिवहन योजना तैयार करेगा। इसका उद्देश्य नागरिकों को सुगम, सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना तथा ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण को कम करना है।

इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी है। निर्वाचित सदस्य अपने क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को प्रभावी ढंग से सामने रख सकेंगे। पानी, सड़क, सीवेज, हरित क्षेत्र और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं की योजनाएं अब जनता की जरूरतों के अनुरूप बन सकेंगी। इससे विकास अधिक संतुलित और समावेशी होगा तथा जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच यदि समय रहते नियोजन नहीं किया गया तो अव्यवस्थित विकास, भूमि के गलत उपयोग, अवैध कॉलोनियों, यातायात की समस्या और जल संकट जैसी चुनौतियां और गंभीर होंगी। नए नियम इन समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। भूमि उपयोग पहले से तय किया जा सकेगा, हरित क्षेत्रों का संरक्षण होगा और बुनियादी सुविधाओं का विकास जनसंख्या के अनुरूप किया जा सकेगा। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि चुनाव समय पर और निष्पक्ष हों, कमेटी के निर्णयों पर प्रभावी अमल हो तथा अथॉरिटी को पर्याप्त वित्तीय और प्रशासनिक स्वायत्तता मिले। यदि ऐसा हुआ तो महानगर क्षेत्र नियोजन एवं विकास नियम, 2026 प्रदेश के शहरी विकास की नई दिशा तय करने के साथ शहरों को अधिक सुव्यवस्थित, संतुलित और रहने योग्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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