नई दिल्ली, 23 जुलाई।
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें देश भर के करोड़ों छात्रों की शिक्षा की आधारशिला हैं, लेकिन अब इसी भरोसे के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। मध्यप्रदेश सहित देश के कई शहरों में नकली एनसीईआरटी किताबों का अवैध कारोबार फिर सक्रिय हो गया है। अभिभावकों का आरोप है कि उनसे असली किताबों की कीमत वसूली जा रही है, जबकि बदले में कमजोर बाइंडिंग, खराब कागज और धुंधली छपाई वाली नकली किताबें थमा दी जाती हैं। यह केवल आर्थिक ठगी का मामला नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के भविष्य पर सीधा हमला है।
इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे का कारण साफ है। अधिकृत एनसीईआरटी पुस्तकों पर विक्रेताओं को सीमित कमीशन मिलता है, जबकि नकली किताबों पर कई गुना अधिक मुनाफा होता है। इसी लालच में कुछ पुस्तक विक्रेता छात्रों के भविष्य को दांव पर लगा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इन डुप्लीकेट किताबों की बड़ी खेप दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार से बाजारों में पहुंच रही है। पैकिंग और कवर भी इस तरह तैयार किए जाते हैं कि पहली नजर में असली और नकली में अंतर करना मुश्किल हो जाए।
नकली किताबों की पहचान आसान नहीं है, फिर भी कुछ अंतर स्पष्ट हैं। असली एनसीईआरटी किताब के हर दूसरे पृष्ठ पर हल्का वाटरमार्क होता है। उसका कागज उच्च गुणवत्ता का और छपाई स्पष्ट होती है, जबकि नकली किताबों में कागज पतला, बाइंडिंग कमजोर और छपाई धुंधली होती है। क्यूआर कोड भी असली किताब में एनसीईआरटी की वेबसाइट तक ले जाता है।
शिक्षा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी है। एनसीईआरटी की नकली किताबें केवल कागज का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी धोखा हैं, जो अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई पर करते हैं। इसलिए सरकार, प्रकाशक और प्रशासन को मिलकर इस माफिया पर निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि हर बच्चे तक असली किताब और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके।










