नई दिल्ली, 23 जुलाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पेपर लीक मामलों में शामिल लोगों को कड़ी और त्वरित सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने का ऐलान किया है। युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच इस मुद्दे पर यह उनकी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया मानी जा रही है।
राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं के बाद राजधानी नई दिल्ली में प्रदर्शन लगातार तेज हो गए हैं। इसी सप्ताह सुरक्षा बलों की कार्रवाई भी देखने को मिली। प्रदर्शनकारी पिछले तीन दिनों से संसद मार्ग पर डटे हुए हैं और कई लोग वहीं डेरा डाले हुए हैं। यह मार्ग संसद भवन को कनॉट प्लेस से जोड़ता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि युवाओं का भविष्य और उनका कल्याण सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक में शामिल लोगों को जल्द और सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे तथा युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
यह आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहा है। मई में व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान के रूप में शुरू हुआ यह संगठन अब परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्तर का मंच बन चुका है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहरी लोगों को भेजकर हिंसा भड़काने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि उनका धरना एक महीने से जारी है और इस दौरान ऐसी कोई घटना नहीं हुई। उनका आरोप है कि बाहर से लोगों को भेजकर जानबूझकर माहौल बिगाड़ने और प्रदर्शनकारियों को उकसाने का प्रयास किया जा रहा है।
बाद में दिपके ने एक्स पर लिखा कि सरकार पूरी दिल्ली बंद करने को तैयार दिख रही है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाने के लिए तैयार नहीं है।
सीजेपी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा मूल समस्या का समाधान नहीं है। उनके अनुसार यह केवल ध्यान भटकाने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि पेपर लीक इसलिए नहीं हो रहे कि देश में फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं थे, बल्कि इसकी वजह शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पूरी तरह विफल कार्यप्रणाली है।
सीजेपी की मांगों में धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेना और हालिया परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले कम से कम 12 छात्रों के प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देना शामिल है।
प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि सोमवार को संसद मार्च के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग राजधानी पहुंचे थे। गुरुवार को प्रदर्शन स्थल के आसपास 16 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सोमवार की पुलिस कार्रवाई के बाद उनका आंदोलन खत्म करने का इरादा और मजबूत हुआ है।
सोमवार को संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। इसके बाद बुधवार को मुंबई, बेंगलुरु और पटना सहित कई शहरों में भी छोटे स्तर पर प्रदर्शन हुए।
सीजेपी के तेजी से उभरने को युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। इस आंदोलन ने विपक्षी दलों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर निशाना साधने का अवसर दिया है।











