भोपाल, 23 जुलाई।
भोपाल के कई रिहायशी इलाकों में पिछले कुछ दिनों से पेयजल की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। रहवासियों का कहना है कि नलों से बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। बच्चों और बुजुर्गों में उल्टी, दस्त तथा पेट दर्द की शिकायतें भी सामने आई हैं। यह स्थिति इंदौर के भागीरथपुरा की घटना की याद दिलाती है, जहां पाइपलाइन में सीवेज का पानी मिलने का मामला सामने आया था।
नगर निगम ने शिकायतों के बाद पानी के नमूने लेकर जांच कराई। रिपोर्ट में पानी को मानकों के अनुरूप और पीने योग्य बताया गया। अधिकारियों का कहना है कि ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला पानी पूरी तरह सुरक्षित है और सप्लाई लाइन में भी कोई गड़बड़ी नहीं है। इसके बावजूद लोगों की शिकायतें लगातार जारी हैं। यही विरोधाभास सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। सैंपल लेने और पानी की वास्तविक सप्लाई के समय में अंतर, पुरानी और जर्जर पाइपलाइन, कम दबाव के दौरान सीवेज का रिसाव तथा घरों की टंकियों की सफाई न होना भी समस्या की वजह बन सकता है। केवल प्रयोगशाला की रिपोर्ट से लोगों का भरोसा नहीं लौटेगा, क्योंकि नागरिक अपने घरों में बदबूदार पानी आने का दावा कर रहे हैं।
नगर निगम को शिकायत वाले क्षेत्रों में अलग-अलग समय पर और अलग-अलग घरों से पानी के नमूने लेने चाहिए। जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग, जियो-टैगिंग के जरिए लीकेज की पहचान और स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही प्रत्येक वार्ड में नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी हो।
पानी जीवन का आधार है। यदि उसकी शुद्धता पर ही सवाल उठने लगें तो यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच भरोसे का भी संकट बन जाता है। भोपाल को सचमुच स्वच्छ और सुरक्षित शहर बनाना है तो हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।










