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संपादकीय
23 Jul, 2026

ड्रोन उड़ेगा गांव में, हक मिलेगा घर का, स्वामित्व योजना से 46 लाख ग्रामीणों की जमीन को मिलेगी कानूनी मान्यता, तहसीलदार के हाथ में आएगी रजिस्ट्री की ताकत

मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे, संपत्ति कार्ड और तहसील स्तर पर रजिस्ट्री की व्यवस्था से ग्रामीणों को कानूनी स्वामित्व, आर्थिक सुरक्षा और पारदर्शी भूमि रिकॉर्ड की सुविधा मिलने का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

भोपाल, 23 जुलाई।

गांव की मिट्टी अब सिर्फ मिट्टी नहीं रहेगी, वह अब कागज पर भी हक बनकर दर्ज होगी। केंद्र और राज्य सरकार की स्वामित्व योजना ने ग्रामीण भारत की उस पुरानी समस्या के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, जो पीढ़ियों से चली आ रही थी—जमीन हमारी, लेकिन मालिकाना हक का प्रमाण नहीं। इस असुरक्षा को अब खत्म करने की तैयारी है। मध्य प्रदेश में इस योजना को तेजी से लागू किया जा रहा है और अब गांवों में संपत्ति की रजिस्ट्री तहसील स्तर पर ही हो सकेगी। तहसीलदार को यह अधिकार देकर सरकार ने न केवल प्रक्रिया को सरल बनाया है, बल्कि लगभग 3000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व का मार्ग भी प्रशस्त किया है।

स्वामित्व योजना का अर्थ है सर्वे ऑफ विलेज एंड मैपिंग विद इम्प्रोवाइज्ड टेक्नोलॉजी इन विलेज एरिया। आसान भाषा में कहें तो ड्रोन गांवों के ऊपर उड़कर प्रत्येक घर, गली और भूखंड का सटीक डिजिटल नक्शा तैयार करेंगे। पुराने अभिलेखों की उलझन, वर्षों से चले आ रहे विवाद और पटवारी के चक्कर धीरे-धीरे समाप्त होंगे। उनकी जगह संपत्ति कार्ड मिलेगा, जो बैंक से ऋण लेने, न्यायालय में स्वामित्व सिद्ध करने और अन्य सरकारी कार्यों में वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे बड़ी समस्या यह रही कि आबादी क्षेत्र की जमीन का स्पष्ट कानूनी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। लोग वर्षों से अपने घरों में रह रहे थे, लेकिन उनके पास स्वामित्व का प्रमाण नहीं था। इसका असर आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर पड़ता था। बैंक ऋण देने से बचते थे, पारिवारिक जरूरतों के समय आर्थिक संकट खड़ा हो जाता था और जमीन से जुड़े विवाद गांवों में तनाव का कारण बनते थे। स्वामित्व योजना ने इसी मूल समस्या को केंद्र में रखा है। ड्रोन सर्वे, जीआईएस आधारित नक्शों और राजस्व अभिलेखों के आधार पर प्रत्येक परिवार को उसकी संपत्ति का कानूनी अधिकार मिलेगा।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब तहसील स्तर पर ही पूरी हो सकेगी। पहले लोगों को जिला मुख्यालय जाना पड़ता था, जहां समय, धन और श्रम तीनों की बर्बादी होती थी। अब तहसीलदार को रजिस्ट्री का अधिकार मिलने से प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी। सरकार का अनुमान है कि इससे स्टाम्प शुल्क के रूप में लगभग 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा, क्योंकि अब तक रिकॉर्ड से बाहर रही संपत्तियां भी कानूनी दायरे में आ जाएंगी।

महिलाओं के लिए भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। संपत्ति कार्ड में पति-पत्नी दोनों के नाम दर्ज करने का प्रावधान उन्हें आर्थिक सुरक्षा और कानूनी अधिकार देगा। इससे परिवार में महिलाओं की भागीदारी मजबूत होगी और संपत्ति पर उनका अधिकार भी सुनिश्चित होगा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। जब किसान के पास अपनी जमीन का वैध दस्तावेज होगा, तब वह आसानी से बैंक से ऋण लेकर खेती में निवेश कर सकेगा और अपनी आय बढ़ा सकेगा।

तकनीक इस पूरी योजना की रीढ़ है। ड्रोन गांव की प्रत्येक छत, सीमा और गली का सटीक सर्वे करेंगे। इसके बाद पूरा डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा, जिससे पंचायत और राजस्व विभाग उसे आसानी से उपयोग कर सकेंगे। इससे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकने में मदद मिलेगी और विकास कार्यों की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी कि कहां सड़क बने, कहां स्कूल और कहां सामुदायिक भवन की आवश्यकता है।

बेशक, इस योजना के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे पहली चुनौती जागरूकता की है। अनेक ग्रामीण अभी भी इसके महत्व से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। दूसरी चुनौती राजस्व अमले की क्षमता की है, क्योंकि लाखों संपत्तियों का सर्वे और अभिलेखीकरण एक साथ करना आसान नहीं होगा। तीसरी चुनौती ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता है। हालांकि सरकार ने इन समस्याओं से निपटने के लिए विशेष शिविर, मोबाइल वैन और प्रशिक्षित कर्मचारियों की व्यवस्था शुरू कर दी है।

करीब 46 लाख ग्रामीणों को इस योजना से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। जिन जिलों में इसका प्रारंभिक क्रियान्वयन हुआ है, वहां से उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। लोगों का कहना है कि पहली बार सरकार उनके दरवाजे तक पहुंचकर उन्हें सम्मान के साथ उनका अधिकार सौंप रही है। स्वामित्व योजना केवल जमीन का दस्तावेज नहीं दे रही, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मविश्वास, सुरक्षा और सम्मान भी दे रही है। जब ड्रोन गांव के ऊपर उड़कर डिजिटल नक्शा तैयार करेगा और उसी आधार पर तहसीलदार स्वामित्व का प्रमाण देगा, तब यह केवल प्रशासनिक सुधार नहीं होगा, बल्कि ग्रामीण विकास की नई इबारत लिखने वाला परिवर्तन सिद्ध होगा।

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