नई दिल्ली, 23 जुलाई।
पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान पर विपक्ष ने आपत्ति जताई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले की आलोचना करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और सरकार ने मिलकर देश के युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था पर पूरी तरह नियंत्रण होने और उसके खराब होने को न केवल होने दिया, बल्कि उसे बढ़ावा भी दिया तथा इसके लिए जिम्मेदार लोगों को संरक्षण प्रदान किया।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस की तीन प्रमुख मांगें हैं। पहली, धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। दूसरी, छात्रों से माफी मांगी जाए और तीसरी, छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
उधर, अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले को छात्रों के आंदोलन को दबाने की लीपापोती बताया। उन्होंने कहा कि सरकार को अदालतों की घोषणा करने के बजाय पेपर लीक के पूरे रैकेट और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश में पहले भी कई मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं, जिनमें पोक्सो और दुष्कर्म से जुड़े मामले भी शामिल हैं, लेकिन वहां भी सुनवाई अपेक्षित गति से नहीं हो रही है।
अरविंद केजरीवाल ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री ने अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई उल्लेख क्यों नहीं किया। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल खड़े किए और कहा कि इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि हर वर्ष पेपर लीक के मामले सामने आते हैं, लेकिन इस बार भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अगले वर्ष नीट परीक्षा में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।
विपक्ष ने एक बार फिर सरकार से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई।











