Naidunia Live
• टॉप न्यूज़ • मध्य प्रदेश • विज्ञान व प्रौद्योगिकी • अपराध • शिक्षा • संपादकीय • धर्म / अध्यात्म • वीडियो स्टोरी • मौसम • त्योहार • प्रेरक कहानियाँ
• वीडियो • न्यूज़ आर्काइव

संपादकीय
23 Jul, 2026

शिक्षा के क्षेत्र में भर्राशाही, आखिर जिम्मेदार कौन?

शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता के प्रयासों के बीच बीएड कॉलेजों की मान्यता, निरीक्षण और जवाबदेही को लेकर उठे सवाल प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित कर रहे हैं।

भोपाल, 23 जुलाई।

राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार प्रयास कर रहे हैं। डिजिटल निगरानी, सख्त निरीक्षण और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था की बातें लगातार की जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आती है। शिक्षा के क्षेत्र में फैली भर्राशाही, लापरवाही और मिलीभगत ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीएड कॉलेजों को बिना पर्याप्त संसाधनों के मान्यता मिलना, शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियां, संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर फाइलों का आगे बढ़ना और निरीक्षण रिपोर्टों की अनदेखी इस बात का संकेत है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामी है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सरकार पारदर्शिता और गुणवत्ता की बात कर रही है तो उसके प्रयासों को कमजोर कौन कर रहा है।

हाल ही में सामने आया एक बीएड कॉलेज का मामला इसका बड़ा उदाहरण है। निरीक्षण टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा था कि कॉलेज में पर्याप्त कक्षाएं, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, योग्य शिक्षक, फर्नीचर तथा पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। कई दस्तावेज भी संदिग्ध पाए गए थे। इसके बावजूद फाइल आगे बढ़ गई और कॉलेज को संचालन की अनुमति मिल गई। बाद में हुए औचक निरीक्षण में स्पष्ट हो गया कि कागजों पर दिखाई गई व्यवस्थाएं वास्तविकता से मेल नहीं खाती थीं। इसके बावजूद छात्रों से मोटी फीस लेकर उन्हें डिग्री देने का सिलसिला चलता रहा। यह केवल एक कॉलेज की कहानी नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था का संकेत है जहां मानकों की अनदेखी कर मान्यताएं दी जा रही हैं।

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है। किसी भी संस्था को मान्यता देने की प्रक्रिया स्थानीय निरीक्षण से शुरू होकर जिला, संभाग और राज्य स्तर तक पहुंचती है। यदि किसी एक स्तर पर भी ईमानदारी से काम हो जाए तो ऐसी अनियमितताओं की गुंजाइश कम हो सकती है। लेकिन जब हर स्तर पर जवाबदेही कमजोर पड़ जाती है तो जिम्मेदारी तय नहीं हो पाती। निरीक्षण रिपोर्ट, फाइलों की जांच और अंतिम अनुमति देने वाले प्रत्येक अधिकारी की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत साबित होती है तो उसके लिए कठोर कार्रवाई आवश्यक है।

मुख्यमंत्री कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि शिक्षा में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कॉलेजों के नियमित भौतिक सत्यापन और रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके बावजूद यदि इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो इसकी जवाबदेही तय होना जरूरी है। केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी भी उतनी ही आवश्यक है। निरीक्षण करने वाले अधिकारी से लेकर अंतिम स्वीकृति देने वाले अधिकारी तक सभी की जवाबदेही तय होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर तत्काल निलंबन तथा कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस तरह की अनियमितताओं का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों और उनके अभिभावकों को होता है। वे भारी फीस इस उम्मीद से चुकाते हैं कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, लेकिन कॉलेजों में न पर्याप्त शिक्षक होते हैं, न प्रयोगशालाएं और न ही आवश्यक शैक्षणिक सुविधाएं। बाद में डिग्री की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न उठते हैं। बीएड जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में यदि गुणवत्ता से समझौता होगा तो भविष्य में स्कूलों तक इसका सीधा असर पहुंचेगा और शिक्षा की नींव कमजोर होगी।

अब आवश्यकता ठोस और प्रभावी कदम उठाने की है। मान्यता और निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनाई जाए। प्रत्येक कॉलेज की मान्यता, शिक्षकों की सूची, आधारभूत सुविधाओं और निरीक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। स्वतंत्र एजेंसी से समय-समय पर थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए तथा शिकायतों के त्वरित निराकरण की प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। दोषी पाए जाने वाले कॉलेजों की मान्यता रद्द करने के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।

मुख्यमंत्री की मंशा और नीति पर प्रश्न नहीं हैं, चुनौती उनके प्रभावी क्रियान्वयन की है। शिक्षा के क्षेत्र में फैली भर्राशाही किसी एक व्यक्ति या विभाग की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की कमजोरी का परिणाम है। इस चक्र को तोड़ने के लिए सरकार को पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त कार्रवाई को प्राथमिकता देनी होगी। आखिर सवाल केवल फाइलों या मान्यताओं का नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य का है। यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ राज्य का भविष्य भी प्रभावित होगा। इसलिए अब आवश्यक है कि दोषियों के विरुद्ध त्वरित और कठोर कार्रवाई कर यह स्पष्ट संदेश दिया जाए कि शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

|
आज का राशिफल

किसी से कहासुनी न हो यह ध्यान रहे। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। कुछ एकाग्रता की प्रवृत्ति बनेगी। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। धर्म-कर्म के प्रति रुचि जागृत होगी। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। शुभांक-5-8-9

आज का मौसम

भोपाल

24° / 27°

Light rain

ट्रेंडिंग न्यूज़