भोपाल, 04 अगस्त।
मध्य प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक प्रवेश के लिए दो चरणों की ऑनलाइन केंद्रीकृत काउंसलिंग पूरी होने के बाद भी करीब 40 हजार सीटें खाली हैं। तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 135 इंजीनियरिंग संस्थानों में उपलब्ध 75,249 सीटों में से अब तक 39,589 सीटों पर प्रवेश नहीं हो सका है। अब इन रिक्त सीटों को भरने की जिम्मेदारी कॉलेज लेवल काउंसलिंग (सीएलसी) पर होगी, जिसकी शुरुआत 7 अगस्त से होगी।
31 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीटेक प्रवेश के लिए 52,248 विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया, जबकि 56,414 अभ्यर्थियों ने चॉइस फिलिंग की। दो चरणों की काउंसलिंग के बाद 35,660 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। इसके बाद विद्यार्थियों को इंटरनल ब्रांच परिवर्तन का अवसर भी दिया गया, जिसका आवंटन सोमवार को जारी कर दिया गया।
इस वर्ष भी कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई) विद्यार्थियों की सबसे पसंदीदा शाखा रही। करीब 21 हजार सीटों में से लगभग 7 हजार प्रवेश इसी शाखा में हुए। दूसरी ओर सिविल इंजीनियरिंग की 7,201 सीटों में केवल 1,042 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया। मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल जैसी पारंपरिक शाखाओं में भी अपेक्षित संख्या में दाखिले नहीं हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीटें खाली रहने की प्रमुख वजह उपलब्ध सीटों की तुलना में अभ्यर्थियों की कम संख्या है। इसके अलावा अधिकांश विद्यार्थी कंप्यूटर साइंस और आईटी जैसी शाखाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखाओं की मांग लगातार घट रही है। निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्लेसमेंट और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर छात्रों की चिंताओं का भी प्रवेश प्रक्रिया पर असर पड़ा है। कई विद्यार्थी अन्य राज्यों या प्रतिष्ठित संस्थानों का चयन करते हैं, वहीं कुछ आवंटन मिलने के बाद भी प्रवेश नहीं लेते।
अब इंजीनियरिंग कॉलेजों की उम्मीद 7 अगस्त से शुरू होने वाली कॉलेज लेवल काउंसलिंग पर टिकी है। हालांकि पिछले वर्षों के रुझानों को देखते हुए इस बार भी सभी रिक्त सीटें भर पाना चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।
















