इस्लामाबाद, 04 अगस्त।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक बयान को लेकर पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से करते हुए उन्हें "दुश्मन" बताए जाने वाले कथित बयान को आंदोलन के प्रति सरकार के सख्त रुख के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में ख्वाजा आसिफ कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह "दुश्मन" बताते दिखाई दे रहे हैं। यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब पीओजेके के विभिन्न क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
एक प्रकाशित विश्लेषण में कहा गया है कि इस तरह की टिप्पणी से आंदोलन के प्रति सरकारी रुख और कठोर होने के संकेत मिलते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के दिनों में रावलाकोट समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो भी साझा किए गए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग किए जाने का दावा किया गया है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 27 जुलाई को रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 21 लोगों की मौत और कई अन्य के घायल होने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों और आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यह भी कहा गया है कि उस दौरान संचार सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण घटनाओं की स्वतंत्र जानकारी जुटाना मुश्किल रहा।
बताया गया है कि विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) कर रही है, जिसका गठन वर्ष 2023 में हुआ था। संगठन ने शुरुआत में महंगी बिजली और गेहूं की बढ़ती कीमतों को लेकर आंदोलन शुरू किया था। बाद में उसने शासन व्यवस्था और चुनावी सुधारों से जुड़ी मांगें भी उठानी शुरू कर दीं, जिनमें विधानसभा में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों की व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार हाल के महीनों में आंदोलन का दायरा रावलाकोट से बढ़कर मुजफ्फराबाद, मीरपुर और अन्य क्षेत्रों तक पहुंच गया है। विश्लेषण में कहा गया है कि यदि विरोध प्रदर्शन और व्यापक होते हैं तो राजनीतिक स्थिति और जटिल हो सकती है। इस बीच, इन दावों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
















