चंडीगढ़, 04 अगस्त।
पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को ई-20 फ्यूल ब्लेंडिंग को अनिवार्य बनाने की नीति के विरोध में प्रस्ताव पारित किया गया। राज्य की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव को अब प्रधानमंत्री और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री को भेजा जाएगा। प्रस्ताव में मांग की गई है कि उपभोक्ताओं को पेट्रोल और ई-20 ईंधन में से अपनी पसंद का विकल्प चुनने की सुविधा मिले।
सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक लगातार दूसरे दिन काले पटके पहनकर सदन में पहुंचे। वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि इस नीति को लागू करने से पहले राज्यों से राय नहीं ली गई। उनका कहना था कि गिरते भूजल स्तर जैसी चुनौतियों से जूझ रहे पंजाब के लिए यह नीति नुकसानदेह साबित हो सकती है। उन्होंने उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देने की भी बात कही।
चर्चा में शामिल कांग्रेस विधायक अवतार हेनरी जूनियर ने दावा किया कि इथेनॉल उत्पादन से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि एक लीटर इथेनॉल तैयार करने के लिए 10,800 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। उन्होंने इस विषय पर विस्तृत अध्ययन के लिए चर्चा एक दिन के लिए स्थगित करने का अनुरोध भी किया।
कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सदन में तथ्य प्रस्तुत करना चाहते हैं। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने चर्चा टालने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया। इस दौरान हरपाल चीमा ने बताया कि पंजाब में इस समय 1 करोड़ 25 लाख 88 हजार 551 पंजीकृत वाहन हैं और इस नीति का असर इन वाहनों पर पड़ सकता है।
बहस में राणा गुरजीत सिंह, अवतार हेनरी जूनियर, परगट सिंह, तरुणप्रीत सिंह सोंद, डॉ. रवजोत सिंह, अमन अरोड़ा और डॉ. बलबीर सिंह ने भी अपने विचार रखे। अंत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह निर्णय बिना पर्याप्त अध्ययन के लिया गया है और इसे लेकर देशभर में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि यह भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा केंद्र सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि यह फैसला किन परिस्थितियों में लिया गया। चर्चा पूरी होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव पर मतदान कराया, जिसे बहुमत से मंजूरी मिल गई।















