नई दिल्ली, 04 अगस्त।
भारत ने 2019 से 2026 के बीच 36 देशों से कुल 274 भगोड़े अपराधियों को वापस लाने में सफलता हासिल की है। गृह मंत्रालय ने बताया कि भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए वर्ष 2018 में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू किया गया। मंत्रालय के अनुसार, भारत ने भगोड़े अपराधियों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी और तकनीक पर आधारित एकीकृत व्यवस्था विकसित की है।
मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले भारत के केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं। उस समय आर्थिक अपराध कर देश छोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई या उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून भी मौजूद नहीं था।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2004 से 2013 के दौरान औसतन हर साल केवल चार भगोड़े अपराधियों का ही प्रत्यर्पण हो सका था। इसी अवधि में 110 प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित रहे। मंत्रालय का कहना है कि पहले की सरकारों ने भगोड़ों को वापस लाने को प्राथमिकता नहीं दी, जबकि वर्तमान सरकार ने इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ाया है।
गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ तीन प्रमुख रणनीतियों—वैश्विक संपर्क, मजबूत समन्वय और प्रभावी कूटनीति—पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भगोड़े अपराधियों का मुद्दा देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।
मंत्रालय ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस दौरान 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ भी नोटिस जारी किए गए हैं।
सरकार ने भारतपोल की शुरुआत कर 1,400 से अधिक एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ा है, जिससे सूचनाओं के आदान-प्रदान में लगने वाला समय घटकर तीन से दस दिन रह गया है। मंत्रालय के अनुसार, ऑपरेशन त्रिशूल के तहत विदेशों में नाम और पहचान बदलकर छिपे भगोड़े अपराधियों का पता लगाने के लिए उपग्रह तकनीक और डिजिटल फुटप्रिंट का भी उपयोग किया गया।















