सतना, 04 अगस्त।
सतना और मैहर जिलों में बारिश के बीच बढ़ी उमस और चिपचिपी गर्मी का असर अब बच्चों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। वायरल बुखार के साथ फोड़े-फुंसी, खुजली और अन्य त्वचा रोग के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। दोनों जिलों के अस्पतालों में बच्चों की ओपीडी में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले 300 से अधिक बच्चों में से 150 से ज्यादा सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार से पीड़ित होते हैं। इनमें से 20 से 25 बच्चों की स्थिति गंभीर होने पर उन्हें प्रतिदिन बच्चा वार्ड और पीआईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है। इसके अलावा रोजाना 30 से अधिक बच्चे फोड़े-फुंसी, खुजली और त्वचा संक्रमण की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं।
अस्पतालों में मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण बच्चा वार्डों पर भी दबाव बढ़ गया है। चिकित्सकों के अनुसार उपलब्ध बिस्तरों की क्षमता से लगभग दोगुने बच्चों का उपचार किया जा रहा है। उनका कहना है कि नमी और चिपचिपी गर्मी के कारण त्वचा संक्रमण तेजी से फैल रहा है। छोटे बच्चों में साफ-सफाई की कमी और लंबे समय तक शरीर पर नमी बने रहने से संक्रमण का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के चेहरे, पीठ और हाथों पर निकलने वाली फुंसियां दर्द के साथ संक्रमण का कारण बन रही हैं। कई मामलों में सूजन और मवाद बनने की शिकायत भी सामने आ रही है, जिससे बच्चों की परेशानी बढ़ रही है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। सुबह से दोपहर तक चाइल्ड ओपीडी में मरीजों की लंबी कतार लगी रहती है और बच्चा वार्डों में भर्ती बच्चों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
चिकित्सकों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। उन्हें नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें और शरीर को साफ एवं सूखा रखें। यदि वायरल बुखार, त्वचा पर चकत्ते, फोड़े-फुंसी या खुजली जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लें। सरकारी अस्पतालों में इन बीमारियों का उपचार उपलब्ध है और समय पर इलाज से अधिकांश बच्चे जल्द स्वस्थ हो जाते हैं।
















