नई दिल्ली, 04 अगस्त।
देश में जहाज निर्माण उद्योग को नई गति देने और भारतीय शिपयार्डों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 24,736 करोड़ रुपये की शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम लागू की है। इसके साथ ही समुद्री क्षेत्र को दीर्घकालिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए 25,000 करोड़ रुपये का समुद्री विकास कोष भी स्थापित किया गया है।
राज्यसभा में लिखित उत्तर देते हुए केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि यह योजना भारतीय शिपयार्डों के सामने मौजूद लागत संबंधी चुनौतियों को कम करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश 26 दिसंबर 2025 को जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि 25,000 करोड़ रुपये के समुद्री विकास कोष में 20,000 करोड़ रुपये का मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड और 5,000 करोड़ रुपये का इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड शामिल है। मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड में केंद्र सरकार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी, जिससे समुद्री क्षेत्र में इक्विटी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वहीं इंटरेस्ट इंसेंटिवाइजेशन फंड के जरिए शिपयार्डों के लिए ऋण की प्रभावी लागत कम करने में मदद मिलेगी। इस कोष के दिशा-निर्देश 20 फरवरी 2026 को जारी किए गए थे और 26 मई 2026 को एसबीआई वेंचर्स लिमिटेड को मैरीटाइम इन्वेस्टमेंट फंड का फंड मैनेजर नियुक्त किया गया।
सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए राष्ट्रीय जहाज निर्माण मिशन का गठन किया गया है। यह अंतर-मंत्रालयी निकाय शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम और शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम के कार्यान्वयन की निगरानी करेगा।
उन्होंने कहा कि शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम के तहत आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने के प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इसके अलावा देश के विभिन्न मौजूदा शिपयार्डों में क्षमता विस्तार से जुड़ी तीन ब्राउनफील्ड परियोजनाओं को भी मंजूरी प्रदान की गई है।
















