भोपाल, 04 अगस्त।
भोपाल में आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। अब मामले की सुनवाई बुधवार को होगी। अरेरा कॉलोनी सहित शहर के कई इलाकों के रहवासी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत की कार्यवाही में शामिल होकर अपने पक्ष में फोटो और वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
शहर के विभिन्न आवासीय क्षेत्रों में लंबे समय से व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने को लेकर विवाद बना हुआ है। अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां सहित कई क्षेत्रों के रहवासियों ने इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई थीं। इसके बाद पूर्णेंदु शुक्ला और अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां इस पर सुनवाई जारी है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद नगर निगम ने दो दिन तक कई प्रतिष्ठानों को सील किया था और कुछ व्यापारियों ने स्वयं भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे। हालांकि, रविवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में हुई बैठक में व्यापारियों को फिलहाल राहत देने का निर्णय लिया गया। बैठक में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की समीक्षा के लिए राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए। समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को किसी प्रकार की चिंता नहीं करने की बात कही गई। इसके बाद सोमवार को अधिकांश दुकानें फिर से खुल गईं।
अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि नगर निगम ने अवैध दुकानों को सील करने के लिए नोटिस जारी किए थे, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दोबारा प्रतिष्ठानों के खुलने पर भी आपत्ति जताई। वहीं कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि भोपाल में लंबे समय से नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से शीघ्र मास्टर प्लान लागू करने और गुजरात की तर्ज पर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था पर विचार करने की मांग की।
रविवार को मुख्यमंत्री की बैठक से पहले अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़ियाकलां के रहवासियों ने संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले पैदल मार्च निकाला था। वहीं भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने भी व्यापारियों के हित में मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई। अब सभी पक्षों की निगाहें बुधवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।
















