भोपाल, 05 अगस्त।
ब्रिक्स समूह अब केवल आर्थिक और राजनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संस्कृति और पर्यटन को भी वैश्विक पहचान देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2026 में मध्यप्रदेश के सांची में होने वाला ब्रिक्स पर्यटन एवं सांस्कृतिक सहयोग सम्मेलन इसी सोच का प्रतीक है। 8 और 9 अगस्त को आयोजित इस सम्मेलन में करीब 100 विदेशी प्रतिनिधि शामिल होंगे। विश्व धरोहर सांची स्तूप और भीमबेटका के शैलाश्रय इस आयोजन के प्रमुख आकर्षण होंगे। यह चयन मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की महत्वपूर्ण पहल है।
ब्रिक्स के विस्तारित स्वरूप में अब ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ ईरान, सऊदी अरब, मिस्र, इथियोपिया और यूएई जैसे देश भी शामिल हैं। इन देशों की विशाल आबादी और आर्थिक क्षमता भारत के लिए पर्यटन, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग की नई संभावनाएं खोलती है। सांची बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण केंद्र है, जबकि भीमबेटका मानव सभ्यता के प्राचीन इतिहास का सजीव प्रमाण प्रस्तुत करता है। ये दोनों स्थल भारत की सांस्कृतिक निरंतरता और विविधता का प्रभावशाली परिचय देंगे।
यह आयोजन राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी लाभकारी साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, मीडिया और पर्यटन उद्योग की भागीदारी से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से वैश्विक मंच पर अपनी सॉफ्ट पावर को भी मजबूत कर सकेगा।
हालांकि, इस अवसर को स्थायी सफलता में बदलने के लिए आधारभूत ढांचे, परिवहन, सुरक्षा और आतिथ्य सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाना होगा। स्थानीय जनजातीय संस्कृति, लोककला और शिल्प को भी प्रमुखता देकर मध्यप्रदेश की संपूर्ण सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करनी होगी। यदि यह आयोजन दूरदर्शी योजना के साथ संपन्न हुआ, तो सांची और भीमबेटका विश्व पर्यटन के नए केंद्र बन सकते हैं और मध्यप्रदेश सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत आधार स्थापित कर सकता है













