सीमावर्ती जिले के कुछ अधिकारी परिवार सहित पड़ोसी राज्य घूम आए। खरीदारी भी हुई, पिकनिक भी हुई, लेकिन जेब से एक रुपया भी नहीं निकला।
अब पूरे जिले में चर्चा इस बात की नहीं कि साहब क्या खरीदकर लाए, बल्कि इस बात की है कि आखिर वह मेहरबान कौन है, जिसने पूरा हिसाब अपने जिम्मे ले लिया।














