नई दिल्ली, 05 अगस्त।
संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार का एक बड़ा फैसला राहत लेकर आया है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की मंजूरी दे दी है। इसका सीधा मतलब है कि अब 25,000 रुपये तक बेसिक वेतन पाने वाले सभी कर्मचारी अनिवार्य रूप से ईपीएफ के दायरे में आएंगे और उन्हें रिटायरमेंट के बाद सामाजिक सुरक्षा का बेहतर कवच मिलेगा। लंबे समय से श्रमिक संगठन और कर्मचारी यह मांग उठा रहे थे कि 2014 से चली आ रही 15,000 रुपये की सीमा महंगाई और वेतन वृद्धि के हिसाब से पुरानी हो चुकी है। अब इस संशोधन से न केवल कवरेज बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में पेंशन राशि में भी वृद्धि की उम्मीद है।
इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ उन लाखों कर्मचारियों को मिलेगा, जो अब तक इस सीमा के कारण ईपीएफ से बाहर थे। छोटे और मध्यम उद्योगों में काम करने वाले अनेक युवा 18,000 से 24,000 रुपये के बीच वेतन पाते हैं, लेकिन उन्हें ईपीएफ का लाभ नहीं मिल पाता था। अब यह कानूनी बाध्यता होगी और नियोक्ता को उनका अंशदान जमा करना होगा। दूसरा लाभ यह है कि जो कर्मचारी पहले से ईपीएफ में हैं, वे अब अधिक वेतन पर भी योगदान कर सकेंगे, जिससे उनका रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण पहलू पेंशन का है। ईपीएस में 8.33 प्रतिशत का योगदान इसी सीमा पर आधारित होता है। सीमा बढ़ने से पेंशन योग्य वेतन भी बढ़ेगा और इसका सीधा असर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन पर पड़ेगा।
लेकिन किसी भी अच्छी योजना की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। पहला सवाल यह है कि कंपनियां इस नए नियम को कितनी ईमानदारी से लागू करेंगी। अतीत बताता है कि कई नियोक्ता वेतन संरचना में बदलाव कर नियमों से बचने का प्रयास करते हैं। इसलिए श्रम विभाग और ईपीएफओ को सख्त निगरानी सुनिश्चित करनी होगी। दूसरा सवाल जागरूकता का है। बड़ी संख्या में कर्मचारी, विशेषकर ठेका और अस्थायी श्रमिक, अभी भी ईपीएफ और ईपीएस के नियमों से अनभिज्ञ हैं। इसलिए व्यापक प्रचार और प्रभावी हेल्पलाइन की व्यवस्था आवश्यक है। तीसरा सवाल तकनीकी तैयारियों का है। लाखों नए खाते खुलने से पोर्टल पर दबाव बढ़ेगा, इसलिए ईपीएफओ को अपनी डिजिटल व्यवस्था पहले से मजबूत करनी होगी।
यह फैसला औपचारिक रोजगार को भी बढ़ावा देगा। सामाजिक सुरक्षा मिलने से अधिक कर्मचारी संगठित क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगे। हालांकि इससे कुछ उद्योगों पर अतिरिक्त लागत बढ़ेगी, लेकिन सामाजिक सुरक्षा को खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देखना चाहिए। सरकार को छोटे उद्योगों के लिए आवश्यक सहयोग और चरणबद्ध व्यवस्था पर भी विचार करना चाहिए। वेतन सीमा को 25,000 रुपये करना समय की मांग के अनुरूप स्वागतयोग्य निर्णय है। अब जरूरत इस बात की है कि इसे पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीकी दक्षता के साथ लागू किया जाए, ताकि यह फैसला करोड़ों कर्मचारियों के भविष्य को वास्तव में सुरक्षित बना सके।













