मलाईदार विभाग में रहते हुए साहब के अपने और अपनों के लिए हर दरवाजा खुला रहता था। विभाग बदलते ही वही दरवाजे अब कैश काउंटर में बदल गए।
पिछले दिनों बच्चों के साथ एक बड़े दरबार पहुंचे तो पुराने अंदाज में आदेश दे बैठे। जवाब मिला, "सर, अब पेमेंट करना पड़ेगा।" बस फिर क्या था, साहब ने मुस्कुराकर लौट जाना ही बेहतर समझा।














