हाथरस, 05 अगस्त।
नगर पालिका परिषद हाथरस की अध्यक्ष श्वेता चौधरी के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार शासन ने सीज कर दिए हैं। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन से संबंधित निविदा प्रक्रिया में वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताओं के आरोपों की जांच के बाद राज्यपाल की स्वीकृति मिलने पर मंगलवार देर रात इस संबंध में आदेश जारी किया गया।
इस प्रकरण की शुरुआत 30 अगस्त 2024 को हुई थी, जब वार्ड-35 के सभासद मनीष अग्रवाल और वार्ड-34 के सभासद पं. सुनील अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी को शिकायत सौंपी थी। शिकायत में 35 वार्डों में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए जारी निविदा प्रक्रिया और कार्यादेश में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। शिकायत में यह भी कहा गया था कि इससे नगर पालिका को आर्थिक नुकसान हुआ है। मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी ने जांच के लिए समिति गठित की थी।
समिति ने निविदा प्रक्रिया और उससे जुड़े अभिलेखों की जांच कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी। शासन स्तर पर रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद कार्रवाई का निर्णय लिया गया। जांच में श्वेता चौधरी को प्रथम दृष्टया कर्तव्यों के निर्वहन में चूक, गंभीर प्रशासनिक अनियमितता, नगर पालिका निधि को नुकसान पहुंचाने, निधि के दुरुपयोग तथा पालिका के हितों के प्रतिकूल कार्य करने का दोषी माना गया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 की धारा 48(2) के तहत की गई है।
शासन के आदेश के अनुसार अब वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार जिला मजिस्ट्रेट अथवा उनके द्वारा नामित ऐसे अधिकारी के पास रहेंगे, जिसका पद डिप्टी कलेक्टर से नीचे का नहीं होगा। वही नगर पालिका परिषद अध्यक्ष से संबंधित वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों का संचालन करेगा। इस संबंध में श्वेता चौधरी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।














