नई दिल्ली, 06 अगस्त।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि के. राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लागू करने में विफल रहने के बाद अब नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित नई टास्क फोर्स केवल सरकार की छवि बचाने का प्रयास है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वर्ष 2024 में नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक की घटना के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार के सुझाव देने के लिए के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति बनाई थी। इसके बाद वर्ष 2026 में दोबारा प्रश्नपत्र लीक होने पर सरकार ने नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में नया उच्च स्तरीय कार्यबल गठित कर दिया।
उन्होंने दावा किया कि नीलेकणी कार्यबल को सौंपे गए नौ संदर्भ बिंदुओं में से सात पर राधाकृष्णन समिति पहले ही विस्तार से काम कर चुकी थी। उनके अनुसार, शेष दो विषयों पर भी समिति आंशिक रूप से विचार कर चुकी थी।
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अब तक राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों में से 27 को भी लागू नहीं कर पाई है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2024 और 2026 के प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के बीच दो वर्षों तक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी में पूर्णकालिक महानिदेशक की नियुक्ति भी नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट लागू करने के मामले में न तो राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई और न ही आवश्यक गंभीरता बरती। उनके अनुसार, नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित नई टास्क फोर्स केवल प्रधानमंत्री की छवि बचाने के उद्देश्य से किया गया ‘डैमेज कंट्रोल’ का प्रयास है।















