नई दिल्ली, 06 अगस्त।
देश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक विविधता और प्रमुख पर्यटन स्थलों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय और नेटफ्लिक्स के बीच रणनीतिक साझेदारी की गई है। इस पहल का मकसद भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता को दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना है।
भारत में नेटफ्लिक्स के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर नई दिल्ली स्थित नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और नेटफ्लिक्स के सह-मुख्य कार्यकारी अधिकारी टेड सारंडोस के बीच चर्चा हुई। बातचीत में इस बात पर विचार किया गया कि कहानियों के माध्यम से लोगों को भारत भ्रमण के लिए कैसे प्रेरित किया जा सकता है और देश की वैश्विक सॉफ्ट पावर को कैसे मजबूत बनाया जाए।
शेखावत ने कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति, विरासत और पर्यटन को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सेतु है। उनके अनुसार, भारत की हर कहानी में दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले व्यक्ति को देश की यात्रा के लिए प्रेरित करने की क्षमता मौजूद है।
उन्होंने बताया कि अतुल्य भारत के डिजिटल मंच पर 'ऐज सीन ऑन नेटफ्लिक्स' फीचर को शामिल किया गया है। इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता को दुनिया तक पहुंचाने और देश की सॉफ्ट पावर को और मजबूत करने की दिशा में एक साझा प्रयास बताया गया।
इस साझेदारी के तहत पर्यटन मंत्रालय ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'ऐज सीन ऑन नेटफ्लिक्स' फीचर जोड़ा है। इसके माध्यम से दुनियाभर के पर्यटक उन स्थानों, त्योहारों, वन्यजीव क्षेत्रों और ऐतिहासिक धरोहरों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिन्हें नेटफ्लिक्स की लोकप्रिय फिल्मों और सीरीज में दिखाया गया है। इसका उद्देश्य पर्दे पर दिखने वाले अनुभवों को वास्तविक यात्रा से जोड़ना है।
कार्यक्रम में पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने कहा कि सरकार और क्रिएटिव इंडस्ट्री के बीच इस तरह की रणनीतिक साझेदारी पर्यटन स्थलों को देखने और समझने के तरीके में सकारात्मक बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि प्रामाणिक कहानियां टिकाऊ पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर भी तैयार करती हैं।
इस अवसर पर पर्यटन मंत्रालय और नेटफ्लिक्स की ओर से संयुक्त रूप से तैयार दो विशेष फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गया। इनमें एक फिल्म भारत की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव पर्यटन पर आधारित थी, जबकि दूसरी फिल्म देश की जीवंत सांस्कृतिक विरासत को समर्पित रही।















