पन्ना, 11 अप्रैल 2026।
देश में बाल श्रम को रोकने के लिए कड़े कानून और अनेक योजनाएं लागू होने के बावजूद पन्ना जिले में इनका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा है। स्थिति यह है कि गरीब परिवारों के बच्चों का बचपन केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जबकि जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नाबालिग बच्चे मजदूरी करते नजर आ रहे हैं। कहीं वे निर्माण स्थलों पर काम करते दिखते हैं तो कहीं होटलों में बर्तन धोते, सफाई करते या कबाड़ बीनते हुए देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद संबंधित विभाग केवल औपचारिकताओं तक सीमित नजर आ रहे हैं और वास्तविक स्तर पर कोई प्रभावी पहल नहीं हो रही है।
बचपन के सपने अधूरे रह रहे हैं, क्योंकि आर्थिक तंगी और सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई बच्चे शिक्षा से दूर हो रहे हैं। पढ़ाई से वंचित होने के चलते उनका भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। कुछ मामलों में बच्चों के गलत रास्ते या नशे की ओर बढ़ने की आशंका भी सामने आ रही है, जो स्थिति को और चिंताजनक बना रही है।
जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बाल श्रम की समस्या स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है, लेकिन श्रम विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। विभागीय स्तर पर आंकड़ों तक सीमित प्रयासों के बीच वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग नजर आती है।
लगातार बढ़ती बाल श्रमिकों की संख्या यह संकेत दे रही है कि इस समस्या को लेकर गंभीरता की कमी बनी हुई है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि जब कानून और योजनाएं मौजूद हैं, तो उनके प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी कौन निभाएगा।













