राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के अंतर्गत सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, रुड़की द्वारा विकसित 13 स्वदेशी तकनीकों को विभिन्न उद्योगों और स्टार्ट-अप्स को हस्तांतरित किया गया। इन तकनीकों में अग्नि सुरक्षा, ऊर्जा दक्षता, टिकाऊ निर्माण और आधारभूत संरचना संरक्षण से जुड़े नवाचार शामिल हैं।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, सीएसआईआर मुख्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर-सीबीआरआई के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. अजय चौरसिया ने कहा कि उद्योगों को केंद्र में रखकर किए जाने वाले तकनीक हस्तांतरण से देश में नवाचार आधारित विकास को नई दिशा मिलेगी।
संस्थान के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर इस प्रकार का आयोजन विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी तकनीकों को उद्योगों तक पहुंचाना भारत के अनुसंधान तंत्र को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर कई तकनीकों का हस्तांतरण किया गया, जिनमें लकड़ी और उसके विकल्पों के लिए अग्निरोधक पारदर्शी कोटिंग, आरसीसी संरचनाओं की सुरक्षा के लिए आईपीएन कोटिंग तकनीक, कम कार्बन ईंट निर्माण तकनीक, हाइब्रिड सौर-सहायित हीट पंप प्रणाली और दीवार सुरक्षा के लिए उच्च शक्ति वाली प्रीफैब्रिकेटेड स्टील कॉर्ड तकनीक शामिल हैं। इन तकनीकों को उद्योगों और स्टार्ट-अप्स को व्यावसायिक उपयोग के लिए सौंपा गया है।
कार्यक्रम के दौरान ‘सीएसआईआर स्मार्ट विलेज पहल’ पर आधारित एक वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें ग्रामीण विकास और सतत तकनीक में संस्थान के योगदान को दर्शाया गया। इसके साथ ही सीएसआईआर-सीबीआरआई की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 भी जारी की गई।
सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर सचिव डॉ. एन कलैसेल्वी ने कहा कि विज्ञान, नवाचार और तकनीक आधारित विकास भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकों का उद्योगों को हस्तांतरण राष्ट्रीय नवाचार प्रणाली को सशक्त कर रहा है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति दे रहा है।







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