सिलीगुड़ी, 06 मई।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम सामने आने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के भीतर आंतरिक असंतोष खुलकर सामने आने लगा है और हार के बाद पार्टी के अंदर बढ़ते मतभेदों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।
सिलीगुड़ी की पूर्व जिला अध्यक्ष पापिया घोष ने पार्टी संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि तृणमूल में कार्यकर्ताओं की स्थिति केवल आदेश पालन तक सीमित रही और पूरे ढांचे में एकतरफा नियंत्रण की व्यवस्था हावी रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में पार्टी किसी संगठित प्रणाली के बजाय अधिकार और अधीनता की संस्कृति पर चलती रही, जिसमें कार्यकर्ताओं की भूमिका केवल निर्देशों का पालन करने तक सीमित कर दी गई थी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
पापिया घोष ने उत्तर बंगाल में पार्टी के कमजोर प्रदर्शन के लिए आंतरिक गुटबाजी और नेताओं के व्यवहार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जनता ने संगठन को नहीं बल्कि नेतृत्व की कार्यशैली को खारिज किया है, जिससे परिणाम प्रभावित हुए हैं।
दूसरी ओर, चुनावी हार के बाद पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीति से जुड़ी संस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर कुछ नेताओं का कहना है कि निर्णय प्रक्रिया में असंतुलन रहा और राज्य नेतृत्व को पर्याप्त स्वतंत्रता नहीं मिल पाई।
नेताओं ने यह भी दावा किया है कि केंद्रीय एजेंसियों की सख्त निगरानी और चुनावी व्यवस्था के चलते पारंपरिक रणनीतियां प्रभावी नहीं रह सकीं, जिससे चुनाव परिणामों पर असर पड़ा।
नतीजों की समीक्षा से पहले ही इस तरह के बयानों ने पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति को उजागर कर दिया है, खासकर उत्तर बंगाल में स्थिति अधिक गंभीर मानी जा रही है। लगातार सामने आ रही नाराज़गी को पार्टी नेतृत्व के लिए आगामी समय में बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।












