भोपाल, 01 जून ।
मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की जांच तेज हो गई है। सोमवार को जांच टीम आरोपी समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह के आवास पर पहुंची, जहां 80 किलो वजन के डमी पुतले की मदद से पूरे घटनाक्रम का सीन रीक्रिएशन किया गया।
जांच के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने घटनास्थल की परिस्थितियों का बारीकी से निरीक्षण किया और आरोपियों के बयानों का सत्यापन वैज्ञानिक तरीके से करने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, एजेंसी यह सुनिश्चित कर रही है कि दिए गए बयान और भौतिक परिस्थितियां एक-दूसरे से मेल खाती हैं या नहीं।
जांच का मुख्य फोकस उस बेल्ट की मजबूती और वजन सहन क्षमता पर है, जिसे कथित रूप से फंदे के रूप में इस्तेमाल किया गया था। इसी पहलू को समझने के लिए 80 किलो के डमी पुतले का उपयोग किया गया, जो मृतका के वजन के करीब बताया जा रहा है।
सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि फंदा किसने और किन परिस्थितियों में खोला गया तथा घटना के बाद घटनास्थल पर क्या गतिविधियां हुईं। इसके लिए फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया जा रहा है।
मामले में गिरफ्तार आरोपी समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह फिलहाल सीबीआई रिमांड पर हैं, जिसकी अवधि 2 जून 2026 को समाप्त होगी। इसके बाद दोनों को अदालत में पेश किया जाएगा।
जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही परिवार से जुड़े कुछ सामान भी जब्त कर फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, जिससे कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।
सीबीआई जिन प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही है, उनमें बेल्ट की वजन सहन क्षमता, फंदा खोलने की स्थिति, आरोपियों के बयान और घटनास्थल के साक्ष्यों का मिलान तथा डिजिटल सबूतों से मिलने वाली जानकारी शामिल है।
इस पूरे मामले में वैज्ञानिक तरीके से जांच कर हर पहलू की पुष्टि करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकें।
इसके अलावा, जांच के घेरे में उप निरीक्षक दिनेश शर्मा की भूमिका भी आ गई है। आरोप है कि घटनास्थल से बरामद बेल्ट को तय प्रक्रिया के तहत तुरंत सुरक्षित नहीं किया गया और वह दो दिनों तक उनकी कार में रखी रही।
अब सीबीआई यह भी जांच कर रही है कि बेल्ट समय पर जब्त क्यों नहीं की गई, उसे कार में रखने का कारण क्या था और क्या इससे साक्ष्यों की शुद्धता प्रभावित हुई। यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।










