नई दिल्ली, 06 मई।
विदेशों से धन प्राप्ति के मामले में भारत ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल किया है। संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में भारत को 137 अरब डॉलर से अधिक की राशि प्राप्त हुई, जो दुनिया में सबसे अधिक है। इस उपलब्धि के साथ भारत ऐसा देश बन गया है, जिसने 100 अरब डॉलर के आंकड़े को पार किया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन की ‘विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026’ में उल्लेख किया गया है कि भारत लगातार इस सूची में अग्रणी बना हुआ है। इस क्रम में मेक्सिको दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपीन और फ्रांस क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। बीते वर्षों में भारत को मिलने वाले धन में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2010 में यह आंकड़ा 53.48 अरब डॉलर था, जो 2015 में 68.91 अरब डॉलर, 2020 में 83.15 अरब डॉलर और 2024 में बढ़कर 137.67 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वर्ष 2024 में इसमें 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च आय वाले देश अब भी रेमिटेंस के प्रमुख स्रोत बने हुए हैं। वर्ष 2024 में अमेरिका सबसे अधिक धन भेजने वाला देश रहा, जहां से 100 अरब डॉलर से अधिक की राशि भारत सहित अन्य देशों में भेजी गई। इसके बाद सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड और जर्मनी का स्थान रहा।
रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। वर्ष 2022 में चीन से 10 लाख से अधिक छात्र विदेशों में अध्ययनरत थे, जबकि भारत दूसरे स्थान पर रहा, जहां से 6.2 लाख से अधिक छात्र विदेश में शिक्षा ग्रहण कर रहे थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय प्रवासी समुदाय देश के प्रौद्योगिकी क्षेत्र को मजबूत करने में अहम योगदान दे रहा है। साथ ही ‘ब्रेन ड्रेन’ की समस्या को ‘ब्रेन गेन’ में बदलने के लिए भारत विभिन्न पहल कर रहा है, जिनमें प्रवासी सम्मेलन और नवाचार केंद्र शामिल हैं। एशिया में आंतरिक विस्थापन के मामलों में प्राकृतिक आपदाओं को प्रमुख कारण बताया गया है।









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