ग्वालियर, 11 अप्रैल 2026।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खण्डपीठ में आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर के उद्घाटन अवसर पर प्रशासनिक न्यायाधिपति आनंद पाठक ने कहा कि जीवन का मूल उद्देश्य कल्याण की भावना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है, तभी वह जरूरतमंद लोगों की बेहतर सहायता कर सकता है और न्याय की उम्मीद रखने वालों के लिए प्रभावी भूमिका निभा सकता है।
शनिवार को आयोजित इस वृहद स्वास्थ्य शिविर में अधिवक्ताओं, सुरक्षा कर्मियों, न्यायालय कर्मचारियों सहित आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया। शिविर में एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, रक्त जांच सहित अन्य आवश्यक परीक्षणों की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और परामर्श मिला।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति आशीष श्रोत्रीय, न्यायमूर्ति अमित सेठ, प्रधान जिला न्यायाधीश ललित किशोर, निरीक्षण न्यायाधीश जाकिर हुसैन सहित अन्य न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। बड़ी संख्या में अधिवक्ता, कर्मचारी और सुरक्षा कर्मियों ने इस शिविर का लाभ उठाया।
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति पाठक ने कहा कि किसी भी कार्य की शुरुआत उसके उद्देश्य को समझकर करनी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस शिविर का आयोजन इसलिए किया गया ताकि न्यायालय से जुड़े सभी लोग शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बन सकें। इससे उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी और वे अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन कर पाएंगे, जिससे समाज को विवाद रहित बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय परिसर को एक विश्वविद्यालय की तरह विकसित होना चाहिए, जहां रचनात्मकता और समग्र विकास पर जोर दिया जाए। उन्होंने वर्ष 2047 तक विवाद मुक्त समाज की कल्पना को साकार करने की बात कही और स्वस्थ जीवन को सबसे बड़ा सुख बताया।













