आगरा, 08 अप्रैल 2026।
आगरा में संविधान निर्माता डॉ0 भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती पर 14 अप्रैल को भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा के बाद तीन दिवसीय भीम नगरी का आयोजन होगा, जिसमें सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए थाना शाहगंज क्षेत्र अंतर्गत गयासपुरा में जीआईसी मैदान में मुख्य कार्यक्रम मंच की तैयारियां शुरू हो गई हैं। कार्यक्रम के दौरान यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा।
शोभा यात्रा का शुभारंभ 14 अप्रैल को मंटोला क्षेत्र अंतर्गत काजीपाड़ा से होगा। परंपरागत रूप से यह यात्रा जिलाधिकारी एवं पुलिस आयुक्त द्वारा शुरू की जाएगी। यात्रा मार्ग में चक्की पाट, बिजली घर, जोहरी बाजार, रावतपाड़ा, जामा मस्जिद, पीपल मंडी, काला महल, गुडरी मंसूर खान, घटिया आजम खान, सेब का बाजार और 12 चौक कोतवाली रिंग, मंडी सदर भट्टी, एमजी रोड, ईदगाह, नामनेर और जिला अस्पताल होते हुए सुभाष पार्क से पंचकुइयां होकर 15 अप्रैल को सुबह जीआईसी मैदान पहुंचेगी।
शोभा यात्रा में तीन हाथियों को निकाला जाएगा। पहला हाथी अंबेडकर भवन नाला काजीपाड़ा से, दूसरा मरहमपुलिया बस्ती नाला काजीपाड़ा से और तीसरा केंद्रीय आयोजन समिति की ओर से अंबेडकर पार्क बिजली घर से निकलेगा। ये हाथी सांय 6 बजे शोभा यात्रा के उद्गम स्थल शिव कंचन होटल चक्की पाट बाजार में एकत्रित होंगे। पहले यह असली हाथी होते थे, अब लकड़ी के हाथियों का उपयोग किया जाता है।
इस वर्ष भीम नगरी का मुख्य मंच सम्राट अशोक के महल की तर्ज पर बनाया जा रहा है, जो भगवान बुद्ध के संदेशों को विश्वभर में पहुंचाने के लिए प्रतीक होगा। कोलकाता से आए 80 से अधिक कारीगरों ने इस मंच के निर्माण में योगदान दिया है। मंच की ऊंचाई 6 फीट, लंबाई 200 फीट और चौड़ाई 70 फीट होगी। महल की ऊंचाई 100 फीट और चौड़ाई 300 फीट तय की गई है। महल के शीर्ष पर पंचशील का झंडा राष्ट्रध्वज के साथ फहराया जाएगा।
भीम नगरी आयोजन समिति के अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी ने बताया कि 15 अप्रैल को सांयकाल मुख्य उद्घाटन होगा, जिसमें भगवान बुद्ध और डॉ0 अंबेडकर के जीवन आदर्शों पर प्रकाश डाला जाएगा। 16 अप्रैल को 101 जोड़ों का सामूहिक विवाह होगा और 17 अप्रैल को मेधावी छात्र-छात्राओं का सम्मान और वर्ष 2027 के आयोजन स्थल की घोषणा की जाएगी।
आगरा में डॉ0 अंबेडकर की शोभा यात्रा की परंपरा 1957 से चल रही है। 1996 से इस यात्रा में राम बारात की तर्ज पर 'भीमनगरी' कार्यक्रम शामिल किया गया। यह यात्रा बाबा साहेब के प्रति अनुयायियों की अटूट आस्था का प्रतीक मानी जाती है।







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