कोलकाता, 08 अप्रैल 2026।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले कोलकाता पोर्ट सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने राकेश सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इस घोषणा के साथ ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी ने इस बार विवादित पृष्ठभूमि वाले नेता को क्यों मैदान में उतारा।
बताया जा रहा है कि बंगाल भाजपा नेतृत्व इस बार राकेश सिंह को तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम के खिलाफ चुनावी मोर्चे पर उतार सकता है। आधिकारिक घोषणा के बाद इन अटकलों को बल मिल गया है।
उम्मीदवार घोषित होते ही राकेश सिंह ने क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में घर-घर जाकर जनसंपर्क अभियान शुरू कर दिया। उन्होंने कोलकाता पोर्ट इलाके के एक मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में राकेश सिंह पर मौलाली स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय बिधान भवन में तोड़फोड़ करने और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पोस्टर पर स्याही फेंकने का आरोप लगा था। यह घटना बिहार में हुई चुनावी रैली के दौरान राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार पर कथित टिप्पणी के विरोध में हुई थी।
उसके बाद राकेश सिंह फरार हो गए थे। पुलिस ने उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। सितंबर में तांगड़ा इलाके से उनकी गिरफ्तारी हुई। इस मामले में उनके कई समर्थक और उनके बेटे शिवम सिंह को भी हिरासत में लिया गया, जिसे बाद में जमानत मिली।
अक्टूबर में कोलकाता पुलिस ने राकेश सिंह और उनके बेटे को कसबा इलाके के एक आवासीय परिसर में कथित हंगामा करने के आरोप में फिर से गिरफ्तार किया। इस मामले में उनकी नाबालिग बेटी को भी हिरासत में लिया गया था।
भाजपा ने अब उन्हें उम्मीदवार घोषित कर दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जिन नेताओं पर कई आपराधिक मामले लंबित हों, उन्हें पार्टी ने क्यों टिकट दिया।








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