न्यायपालिका
13 May, 2026

बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला: सेवा बॉन्ड उल्लंघन पर सख्त रुख

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सेवा अनुबंध का उल्लंघन कर नौकरी छोड़ने वाला कर्मचारी नियोक्ता को रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

मुंबई, 13 मई।

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी सेवा अनुबंध या बॉन्ड का उल्लंघन करते हुए नौकरी छोड़ता है, तो वह कंपनी से रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने की अनिवार्यता नहीं थोप सकता। यह निर्णय न्यायमूर्ति संदीप वी. मारने की एकल पीठ ने भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड बनाम एक कर्मचारी मामले में सुनाया।

मामला एक ऐसे कर्मचारी से जुड़ा था, जिसने कंपनी के साथ सेवा बॉन्ड करार किया था। इसके अनुसार उसे विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद कम से कम तीन वर्ष तक कंपनी में कार्य करना आवश्यक था।

कंपनी ने उसे एविएशन क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया, जिसमें अमेरिकी एयरलाइंस के माध्यम से बोइंग बी-777 विमान से संबंधित ऑनलाइन प्रशिक्षण भी शामिल था। इस प्रशिक्षण के बाद कर्मचारी “एयरक्राफ्ट मेंटिनेंस टेक्नीशियन” से पदोन्नत होकर “एयरक्राफ्ट मेंटिनेंस इंजीनियर” बन गया।

लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही कर्मचारी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कंपनी ने यह कहते हुए कार्यमुक्त आदेश और अनुभव प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया कि उसने सेवा अनुबंध का उल्लंघन किया है।

इस विवाद को कर्मचारी ने औद्योगिक न्यायाधिकरण में चुनौती दी, जहां अंतरिम आदेश में कंपनी को रिलीविंग लेटर और सेवा प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया गया। कंपनी ने इसी आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

उच्च न्यायालय ने पाया कि कर्मचारी स्वयं यह स्वीकार कर चुका था कि उसे कंपनी द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। इस्तीफे में भी उसने माना था कि उसने कंपनी के सहयोग से महत्वपूर्ण पद तक उन्नति की है और बोइंग बी-777 प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि जब कोई कर्मचारी वैध सेवा बॉन्ड का उल्लंघन कर स्वयं नौकरी छोड़ता है, तो कंपनी द्वारा उसका इस्तीफा स्वीकार न करना अनुचित नहीं माना जा सकता। केवल इस आधार पर कि कंपनी ने अब तक क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए कार्रवाई शुरू नहीं की है, यह नहीं कहा जा सकता कि कर्मचारी अनुबंधीय दायित्वों से मुक्त हो गया।

अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारी ने स्वयं जोखिम लेकर बॉन्ड अवधि से पहले नौकरी छोड़ी, इसलिए वह यह अपेक्षा नहीं कर सकता कि कंपनी उसे नई नौकरी प्राप्त करने में सहयोग दे।

न्यायालय ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशिक्षित कर्मचारी, जिसने अनुबंध का उल्लंघन किया है, वह यह दावा नहीं कर सकता कि नियोक्ता उसे किसी अन्य कंपनी में नौकरी दिलाने में सहायता करे।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा कर्मचारी प्रशिक्षण के आधार पर अपने पद को तकनीशियन से इंजीनियर में उन्नत कर लेने के बाद कंपनी को किसी प्रतिद्वंद्वी संस्था में नियुक्ति दिलाने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

पीठ ने यह भी चिंता जताई कि यदि ऐसे मामलों में कंपनियों को बाध्य कर रिलीविंग लेटर और अनुभव प्रमाण पत्र जारी कराने का दबाव बनाया जाए, तो इससे विमानन क्षेत्र में असंतुलित प्रतिस्पर्धा और प्रतिभा खींचने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिल सकता है।

न्यायालय ने माना कि औद्योगिक न्यायाधिकरण ने अंतरिम स्तर पर ही अंतिम राहत प्रदान कर त्रुटि की थी। इसके चलते उच्च न्यायालय ने उसका आदेश रद्द करते हुए कंपनी की याचिका स्वीकार कर ली।

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