नई दिल्ली, 06 मई।
भारत के इस्पात क्षेत्र ने अप्रैल 2026 में भी अपनी मजबूत विकास रफ्तार को बरकरार रखा है, जहां आधारभूत ढांचे और विनिर्माण क्षेत्रों में जारी सशक्त घरेलू मांग के कारण उत्पादन और खपत दोनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस्पात मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल माह में कच्चे इस्पात का उत्पादन 14.09 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष अप्रैल 2025 के 13.31 मिलियन टन की तुलना में 5.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है। इसी अवधि में तैयार इस्पात का उत्पादन 13.05 मिलियन टन दर्ज किया गया, जिसमें 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। वहीं तैयार इस्पात की खपत भी बढ़कर 12.99 मिलियन टन हो गई, जो 8.1 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि को दर्शाती है।
मंत्रालय ने बताया कि यह बढ़ोतरी निर्माण, अवसंरचना और विनिर्माण जैसे अंतिम उपयोग वाले क्षेत्रों में लगातार बनी हुई तेजी का परिणाम है। इसी दौरान हॉट मेटल उत्पादन में भी 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पिग आयरन का उत्पादन घटकर 0.69 मिलियन टन रह गया, जो 6 प्रतिशत की गिरावट है।
व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार भारत इस अवधि में मामूली शुद्ध आयातक बना रहा, जहां आयात 0.68 मिलियन टन और निर्यात 0.47 मिलियन टन दर्ज किया गया। तुलना में पिछले वर्ष अप्रैल में आयात 0.52 मिलियन टन और निर्यात 0.38 मिलियन टन था, जिससे इस वर्ष आयात में 30.8 प्रतिशत और निर्यात में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
मंत्रालय के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश की कुल इस्पात क्षमता लगभग 220 मिलियन टन प्रतिवर्ष रही, जो वर्ष 2030 तक 300 मिलियन टन के राष्ट्रीय इस्पात लक्ष्य की दिशा में अग्रसर है। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए कई प्रमुख इस्पात कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता का लगातार विस्तार कर रही हैं।
अप्रैल माह में घरेलू बाजार में इस्पात की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखी गई, जहां टीएमटी और रीबार के दाम मासिक आधार पर लगभग 2.6 प्रतिशत बढ़े, वहीं वार्षिक आधार पर भी 3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह कई महीनों की स्थिरता के बाद पहली सकारात्मक बढ़त मानी जा रही है।
इसी तरह फ्लैट इस्पात श्रेणी में भी तेज वृद्धि देखी गई, जिसमें हॉट-रोल्ड कॉइल की कीमतों में लगभग 6.3 प्रतिशत और जीपी शीट की कीमतों में लगभग 7.3 प्रतिशत की मासिक वृद्धि दर्ज हुई, जो बाजार में मजबूत मांग का संकेत देती है। कुल मिलाकर अप्रैल 2026 में इस्पात क्षेत्र ने मजबूत घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियों के दम पर अपनी विकास गति को बनाए रखा।



.jpg)






