महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस के साथ पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक की अध्यक्षता आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की।
बैठक में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों, साइबर अपराध, पीछा करने की घटनाएं, मानव तस्करी और घरेलू हिंसा जैसे मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई।
आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में पुलिस और संरक्षण अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है, ताकि पीड़ितों को समय पर सहायता और न्याय मिल सके।
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा ने बताया कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सभी महिला पुलिस थानों की स्थापना की दिशा में काम चल रहा है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि पुलिस नियंत्रण कक्ष की टीमें औसतन पांच से सात मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंच रही हैं, जिसे देश के सबसे तेज प्रतिक्रिया तंत्रों में शामिल किया जा रहा है।
साइबर अपराध के मामलों पर चर्चा के दौरान बताया गया कि महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट को हटाने की प्रक्रिया का समय पहले के लगभग छत्तीस घंटे से घटाकर तीन घंटे तक कर दिया गया है।
“शिष्टाचार” अभियान के तहत महिला पुलिसकर्मियों द्वारा सादे कपड़ों में सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी कर छेड़छाड़ रोकने के प्रयासों की सराहना की गई। वहीं “निर्भीक” अभियान के माध्यम से स्कूलों में बच्चों को सुरक्षा और जागरूकता से संबंधित जानकारी दी जा रही है।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि वर्तमान में महिला कर्मियों की भागीदारी बढ़कर लगभग बीस प्रतिशत हो गई है, जो पहले काफी कम थी। बैठक में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए संयुक्त प्रयास जारी रखने पर सहमति जताई गई।











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