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15 May, 2026

बिरसा 101 कार्यशाला में सिकल सेल जीन थेरेपी पर मंथन, स्वदेशी सीआरआईएसपीआर तकनीक पर जोर

सीएसआईआर-आईजीआईबी में आयोजित बिरसा 101 कार्यशाला में सिकल सेल रोग के लिए स्वदेशी सीआरआईएसपीआर जीन थेरेपी पर चर्चा के साथ जनजातीय स्वास्थ्य सुधार और तकनीकी नवाचार पर बल दिया गया।

नई दिल्ली, 15 मई।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा जीनोमिक्स एवं समेकित जीवविज्ञान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में “बिरसा 101” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें सिकल सेल रोग के लिए भारत की पहली स्वदेशी सीआरआईएसपीआर आधारित जीन थेरेपी पर विस्तृत चर्चा की गई। यह कार्यक्रम सीएसआईआर-आईजीआईबी परिसर में जनजातीय गौरव उत्सव 2026 के तहत आयोजित किया गया, जो विकसित भारत की यात्रा को समर्पित एक महीने तक चलने वाला आयोजन है।

इस अवसर पर बताया गया कि जनजातीय गौरव उत्सव के पहले सप्ताह का विषय “विकास के चालक के रूप में तकनीक” रखा गया है, जिसमें नवाचार आधारित परिवर्तन और तकनीकी उपलब्धियों के माध्यम से जनजातीय कल्याण को गति देने पर जोर दिया जा रहा है।

“बिरसा 101” परियोजना का नाम भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में रखा गया है, जो भारत के जैव प्रौद्योगिकी और जीनोमिक अनुसंधान क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य देश में सिकल सेल रोग के उन्मूलन के प्रयासों को आगे बढ़ाना है, जो विशेष रूप से जनजातीय समुदायों को प्रभावित करता है। मंत्रालय ने इस परियोजना को लगभग 3.75 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे जनजातीय स्वास्थ्य और सस्ती चिकित्सा नवाचारों को बल मिले।

कार्यशाला में मंत्रालय की सचिव ने उन्नत वैज्ञानिक शोध और स्वदेशी नवाचारों के उपयोग पर बल देते हुए जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही वैज्ञानिक संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय को अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए आवश्यक बताया गया।

सीएसआईआर-आईजीआईबी के निदेशक ने जीनोमिक्स, सीक्वेंसिंग और ट्रांसलेशनल बायोमेडिकल अनुसंधान में संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण किया। इसमें प्रिसिजन मेडिसिन, जीनोम अनुक्रमण, दुर्लभ रोगों पर अनुसंधान, भारतीय स्तन कैंसर जीनोम अध्ययन, मानव माइक्रोबायोम और कोविड-19 के दौरान जीनोमिक प्रतिक्रिया जैसे कार्यक्रम शामिल रहे।

सीएसआईआर-टीकेडीएल की निदेशक ने पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने के लिए डिजिटल लाइब्रेरी के कार्यों की जानकारी दी, जिसमें जनजातीय औषधीय परंपराओं का दस्तावेजीकरण भी शामिल है।

सीआरआईएसपीआर आधारित जीन एडिटिंग तकनीक और “बिरसा 101” की तकनीकी प्रगति पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें 2017 से अब तक की प्रगति और सिकल सेल रोग के लिए किफायती उपचार विकसित करने के प्रयासों को रेखांकित किया गया।

सत्र के दौरान सिकल सेल योद्धाओं और रोग से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए तथा शीघ्र निदान, जागरूकता और सस्ती दवाओं की उपलब्धता की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यशाला में बताया गया कि तकनीक का हस्तांतरण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ सहयोग के लिए किया गया है, जिससे आगे नैदानिक और उत्पादन विकास को गति मिलेगी।

कार्यक्रम के अंत में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्माण इकाई और अनुसंधान ढांचे का निरीक्षण किया तथा परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। पूरी कार्यशाला में स्वदेशी नवाचार, संस्थागत सहयोग और तकनीक आधारित स्वास्थ्य समाधान के महत्व को रेखांकित किया गया।

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