ओटावा, 07 मई।
देश बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। अलगाववादी समूहों का दावा है कि उन्होंने जनमत संग्रह के लिए आवश्यक समर्थन जुटा लिया है, जिसके बाद स्वतंत्रता को लेकर मतदान की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। इस आंदोलन ने देश की राजनीतिक बहस को एक बार फिर गर्म कर दिया है।
अलगाव समर्थक नेताओं के अनुसार उन्होंने लगभग तीन लाख हस्ताक्षर चुनाव अधिकारियों को सौंपे हैं, जबकि जनमत संग्रह के लिए आवश्यक न्यूनतम संख्या एक लाख अठहत्तर हजार निर्धारित है। आंदोलन के प्रमुख नेता मिच सिल्वेस्ट्रे ने इसे ऐतिहासिक मोड़ बताते हुए कहा है कि यह प्रयास अब अगले चरण में पहुंच चुका है।
हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि केवल हस्ताक्षर पूरे होने से जनमत संग्रह तय नहीं हो जाता। पहले इनकी जांच चुनाव आयोग द्वारा की जाएगी और इसके साथ ही इस प्रक्रिया पर न्यायालय द्वारा अस्थायी रोक भी लागू है। यदि सभी कानूनी बाधाएं दूर होती हैं तो उन्नीस अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान में लोगों से पूछा जा सकता है कि क्या अल्बर्टा को कनाडा से अलग होकर स्वतंत्र राष्ट्र बनना चाहिए। वर्तमान सर्वेक्षणों में लगभग तीस प्रतिशत समर्थन मिलने के कारण परिणाम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
अल्बर्टा की प्रांतीय प्रमुख डेनिएल स्मिथ ने कहा है कि यदि आवश्यक हस्ताक्षर सत्यापित हो जाते हैं तो मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, हालांकि उन्होंने स्वयं अलगाव का समर्थन नहीं किया है। यह मांग नई नहीं है, क्योंकि यह प्रांत लंबे समय से आर्थिक और राजनीतिक असंतोष को लेकर आवाज उठाता रहा है।
अल्बर्टा कनाडा के प्रमुख तेल और गैस उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है, और यहां के लोगों का मानना है कि उनके संसाधनों का लाभ अन्य क्षेत्रों को अधिक मिलता है, जबकि उनके निर्णयों में भागीदारी सीमित है। केंद्र और प्रांत के बीच पर्यावरण नीतियों और ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर भी लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
राजनीतिक रूप से भी अल्बर्टा को अपेक्षाकृत रूढ़िवादी विचारधारा वाला क्षेत्र माना जाता है, जबकि केंद्र सरकार में उदारवादी नीतियों का प्रभाव अधिक है। इसी कारण मतभेद लगातार गहराते रहे हैं।
इस बीच कुछ आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक समूह इस आंदोलन को अप्रत्यक्ष समर्थन दे रहे हैं, हालांकि कनाडा सरकार ने ऐसे दावों को खारिज करते हुए संप्रभुता पर जोर दिया है। कुछ चर्चाओं में अल्बर्टा को किसी अन्य देश से जोड़ने की संभावनाओं का भी उल्लेख हुआ है, जिससे बहस और तेज हो गई है।
कनाडा में इससे पहले क्यूबेक प्रांत में भी दो बार अलगाव को लेकर जनमत संग्रह हो चुका है, लेकिन दोनों बार जनता ने देश में बने रहने का निर्णय लिया था। सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसी भी प्रांत के अलग होने के लिए कठोर कानूनी प्रक्रिया और केंद्र सरकार की सहमति आवश्यक है, जिससे यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल मानी जाती है।





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