बिलासपुर, 21 मई।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों पर निर्धारित सीमा से अधिक दिव्यांग अभ्यर्थियों का चयन केवल योग्यता के आधार पर करना विधि सम्मत नहीं है और इसे नियमों के विपरीत माना जाएगा।
न्यायालय ने जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा तैयार की गई मेरिट सूची की विस्तृत समीक्षा की और उसे संशोधित करते हुए 90 दिनों के भीतर नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश जारी किया है।
यह मामला उमेश कुमार श्रीवास सहित अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि लोक शिक्षण संचालनालय ने 9 मार्च 2019 को व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने ओबीसी वर्ग के तहत मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया था।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि चयन प्रक्रिया के दौरान जारी प्रोविजनल मेरिट सूची में ओबीसी वर्ग के पदों पर सात प्रतिशत की निर्धारित सीमा से अधिक दिव्यांग उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया, जिससे सामान्य ओबीसी अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हुए और आरक्षण व्यवस्था का संतुलन बिगड़ गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की कि चयन समिति द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है और इससे विभिन्न श्रेणियों के अभ्यर्थियों को समान अवसर उपलब्ध नहीं हो पाता, जो कि आरक्षण और भर्ती नियमों के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।















