गुवाहाटी, 25 मई।
असम विधानसभा के चल रहे सत्र के तीसरे दिन सोमवार को सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक सदन में पेश कर दिया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की अनुपस्थिति में संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो असम उत्तराखंड और गुजरात के बाद देश का तीसरा राज्य बन जाएगा जहां यूसीसी लागू होगा।
विधेयक पेश किए जाने के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। संभावना जताई जा रही है कि मौजूदा सत्र के दौरान इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होगी और 27 मई को इसे पारित किया जा सकता है।
राज्य मंत्रिमंडल ने 13 मई को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के दूसरे कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्तावित कानून के मसौदे को मंजूरी दी थी। यह बैठक गुवाहाटी स्थित कोइनाधारा के स्टेट गेस्ट हाउस में हुई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि यूसीसी विधेयक को इसी सत्र में सदन में रखा जाएगा। यह सत्र 21 मई से शुरू होकर 26 मई को समाप्त होगा।
सरकार के अनुसार प्रस्तावित कानून से अनुसूचित जनजाति (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजाति (मैदानी) समुदायों को बाहर रखा गया है। इसके अलावा पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाज, प्रथाएं और अनुष्ठान भी इस कानून के दायरे से मुक्त रहेंगे।
यूसीसी विधेयक में मुख्य रूप से चार बिंदु शामिल हैं— विवाह की न्यूनतम आयु तय करना, बहुविवाह पर रोक, पैतृक संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामलों को कानूनी दायरे में लाना। सरकार का कहना है कि यह कदम सामाजिक और पारिवारिक व्यवस्था में समानता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
हाल के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 126 सदस्यीय सदन में 82 सीटें जीतकर मजबूत स्थिति हासिल की थी। उसके सहयोगी असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने 10-10 सीटें जीती थीं, जिससे एनडीए की कुल सीटें 102 हो गई हैं।







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