नैनीताल, 28 मई।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आलोक कुमार वर्मा ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है।
उनके इस्तीफे की पुष्टि विधि एवं न्याय मंत्रालय की अधिसूचना और संबंधित आधिकारिक सूचना के माध्यम से की गई है।
उधर, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश आशीष नैथानी आगामी तीन जून को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं, जिनके सम्मान में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित किया जाएगा।
इसके साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के दो पद रिक्त होने की स्थिति बन रही है।
विधि एवं न्याय मंत्रालय की 27 मई की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) के परंतुक (क) के तहत 30 अप्रैल 2026 से प्रभावी रूप से त्यागपत्र दिया है।
जानकारी के अनुसार उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से मार्च माह में ही अपना इस्तीफा सौंप दिया था, जबकि वह इसी वर्ष अगस्त के प्रथम सप्ताह में सेवानिवृत्त होने वाले थे।
न्यायमूर्ति वर्मा का जन्म 16 अगस्त 1964 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में हुआ था तथा उन्होंने डीएवी पीजी डिग्री कॉलेज वाराणसी से स्नातक और वर्ष 1985 में हरीश चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय से एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की।
वर्ष 1987 में उनका चयन उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में हुआ और उन्हें झांसी में मुंसिफ सिविल न्यायाधीश जूनियर डिवीजन के रूप में नियुक्त किया गया।
इसके बाद उन्होंने विभिन्न जनपदों में न्यायिक दायित्व निभाए और वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उत्तराखंड न्यायिक सेवा में शामिल हुए।
उन्होंने टिहरी गढ़वाल, चमोली, ऊधमसिंहनगर और देहरादून में जिला न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं तथा राज्य सरकार में प्रधान सचिव विधि-सह-कानूनी सलाहकार के पद पर भी कार्य किया।
केंद्र सरकार की 22 मई 2019 की अधिसूचना के बाद उन्हें उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 27 मई 2019 को शपथ ग्रहण के बाद 25 मई 2021 को स्थायी न्यायाधीश बने।
इधर न्यायाधीश आशीष नैथानी की सेवानिवृत्ति तीन जून को निर्धारित है और इस अवसर पर अपराह्न साढ़े तीन बजे मुख्य न्यायाधीश की अदालत में फुल कोर्ट रेफरेंस आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने 29 अप्रैल 1992 को उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा से अपने न्यायिक जीवन की शुरुआत की थी और राज्य गठन के बाद उत्तराखंड न्यायपालिका में सेवाएं जारी रखीं।
वर्ष 2011 में वह जिला न्यायाधीश बने तथा जनवरी 2025 में उन्हें उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया, इससे पूर्व वह महानिबंधक के पद पर भी कार्य कर चुके हैं।











