नई दिल्ली, 29 मई ।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (एनएफएचएस-6) में देश के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार संस्थागत प्रसव का स्तर बढ़कर 90.6 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित मातृत्व सेवाओं तक बेहतर पहुंच का संकेत है।
सर्वेक्षण में बताया गया है कि 95.6 प्रतिशत बच्चों को अधिकांश टीके सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से लगाए गए हैं, जिससे देश की प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते भरोसे की पुष्टि होती है।
प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) कवरेज में भी सुधार हुआ है, जो 92.6 प्रतिशत से बढ़कर 95.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह गर्भवती महिलाओं की बेहतर निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं की सुदृढ़ता को दर्शाता है।
बच्चों के टीकाकरण में भी लगातार मजबूती देखी गई है, जहां 12 से 23 महीने आयु वर्ग के 96 प्रतिशत से अधिक बच्चों को कम से कम एक टीका लगाया गया है, जबकि पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 87.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में रोटावायरस टीकाकरण में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले सर्वेक्षण की तुलना में दोगुने से अधिक हो गई है। इससे बच्चों में रोके जा सकने वाले रोगों के नियंत्रण में मदद मिली है।
बाल पोषण संकेतकों में भी सुधार देखा गया है, जिसमें अवरुद्ध वृद्धि (स्टंटिंग) में 17 प्रतिशत की कमी और गंभीर कुपोषण (सीवियर वेस्टिंग) में 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
एनएफएचएस-6 में आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सहित अन्य स्वास्थ्य सुरक्षा पहलों के माध्यम से परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होने और स्वास्थ्य सेवाओं में वित्तीय सुरक्षा मजबूत होने का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत में सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, टीकाकरण विस्तार और पोषण सुधार की दिशा में जारी प्रयासों को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।




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