किशनगंज, 30 मई ।
भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के माध्यम से अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में किशनगंज की एक अदालत ने एक अमेरिकी नागरिक को दोषी ठहराते हुए ढाई वर्ष यानी दो वर्ष छह माह के कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अदालत के आदेश के अनुसार यदि दोषी जुर्माने की राशि अदा नहीं करता है तो उसे एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। यह फैसला विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज मामले में सुनाया गया है।
जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-प्रथम की अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर शफीउल आलम को दोषी करार दिया। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार वह अमेरिका के न्यू जर्सी राज्य के अटलांटा सिटी स्थित नॉर्थ हार्डफोर्ट एवेन्यू का निवासी बताया गया है।
यह मामला सत्र परीक्षण वाद संख्या 110/2025 तथा दिघलबैंक थाना कांड संख्या 38/2024 से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के अनुसार 30 मार्च 2024 को सशस्त्र सीमा बल को सूचना मिली थी कि नेपाल मार्ग से एक संदिग्ध व्यक्ति भारत में प्रवेश कर चुका है, जिसके बाद दिघलबैंक क्षेत्र में त्वरित कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान शफीउल आलम को हिरासत में लिया गया, जबकि उसके साथ पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया गया, जिस पर अवैध प्रवेश में सहयोग करने का आरोप है।
गिरफ्तारी के समय उसके पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए, जिनमें क्रेडिट व डेबिट कार्ड, कैसीनो कार्ड, न्यू जर्सी का ड्राइविंग लाइसेंस, अमेरिकी और नेपाली मुद्रा सहित अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज शामिल थे, जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि वह लंबे समय से अमेरिका में रह रहा था तथा कथित तौर पर एक लाख रुपये के भुगतान के बदले नेपाल के काकरभिट्टा से भारत के रास्ते बांग्लादेश पहुंचाने की योजना में शामिल था, जबकि उसका वीजा और पासपोर्ट पहले ही समाप्त हो चुके थे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उसके पास भारत में प्रवेश का कोई वैध दस्तावेज नहीं था और न ही उसने अधिकृत आव्रजन मार्ग का उपयोग किया था, जिसके चलते उसे विदेशी अधिनियम के तहत दोषी पाया गया और न्यायालय ने सजा सुनाई।




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